मंगलवार, 14 जुलाई 2009

धार्मिक गानों में ही मिलता सच्चा सुख

Jul 11, 10:22 pm
चित्रकूट। भले ही आज फिल्मी दुनिया में गाते बजाते पन्द्रह साल बीत गये हों और तमाम हिट फिल्मों में संगीत दिया हो पर सुख तो धार्मिक गानों को गाने में ही मिलता है। यह कहना है संगीतकार सुजीत चौबे का।
उनका कहना है सबसे ज्यादा सुख तो गुरुदेव के कार्यक्रमों में ही अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करने के बाद मिलता है। कहा कि कक्षा छह से संगीत की लगन लग गयी। सो बनारस घराने के पं. देवानंद पाठक को गुरु बना लिया। स्कूली शिक्षा के बाद जब आकाशवाणी से जुड़ गये। वर्ष 1996 में मुम्बई से पद्मा खन्ना का बुलावा आ गया। फिर वे जाकर मायानगरी में रमे तो उनके खाते में शबनम मौसी, राजा भैया, क्रांति वीर, परदेशी रे, गाड एंड गन, गंगोत्री के रुप में तमाम हिट फिल्में मिली। बाबा भोले नाथ की नगरी से भोजपुरी भाषा का जुड़ाव उनके खाते में यहां भी तमाम हिट फिल्मों को दिला गया। कभी बचपन में पिता जी के साथ चित्रकूट आने वाले सुजीत चौबे बताते हैं कि आशुतोष राणा से उनकी मुलाकात 1997 में मारीशस में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उनके बताने पर वह तभी से वह दद्दा जी के शिष्य बन गये।

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