मंगलवार, 14 जुलाई 2009

जेबकतरे साफ कर रहे भक्तों की जेब

Jul 14, 10:41 pm
चित्रकूट। परिक्षेत्र के आसपास के गांवों के साथ ही रामायण मेला परिसर के पास के तमाम मुहल्लों की मानो लाटरी सी खुल गई। सावन के पहले ही दिन बिन मांगे रोजगार जो मिल गया। इस कारण तमाम लोग नंगे पैर और खाली जेब घर जा रहे हैं। महारुद्र पंडाल के साथ ही रामायण मेला परिसर पर आने वाले लोग जेबकतरों का शिकार हो रहे हैं तो महारुद्रों का निर्माण करने वालों के जूते चप्पल भी गायब हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक संकल्प पूर्ति महामहोत्सव के प्रारंभ होने के पहले ही दिनों से भगवा वेश में रंगे तमाम भिखारियों की भरमार सीतापुर में हो गई थी। पहले दिन से यहां पर लोगों की जेब कटने का सिलसिला भी तेजी से चल रहा है। मुम्बई से आये छगन भाई व रोमेश पवार ने बताया कि अभी तक उनकी जेब चार बार कट चुकी है। पुलिस कर्मियों से बात करने पर टका सा जवाब देते हैं कि अपनी सुरक्षा खुद क्यों नही करते। हमारा काम वीआईपी की देखरेख और मेला को नियंत्रित रखने की है। झांसी से आये तेज प्रकाश सिंह बताते हैं कि चप्पलें तो तीन दिनों में तीन बार उनकी गायब हुई। हर बार नंगे पैर जाकर नई चप्पल लानी पड़ी।

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