Jul 04, 10:26 pm
चित्रकूट। सात जुलाई से होने वाले महारुद्र यज्ञ के लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्य यहां यज्ञ की सफलता के लिए जीजान से जुटे हैं।
पिछले तीस यज्ञों से दद्दा धाम व यज्ञशाला का निर्माण करने वाले उत्तम सिंह कहते हैं कि उनका मूल कार्य खेती और स्टोन क्रशर का है, पर उन्होंने दद्दा जी के बताये नक्से के अनुसार इस यज्ञशाला व दद्दा धाम का निर्माण कैसे कर लिया वे स्वयं ही नही जानते। उन्होंने बताया कि इस यज्ञ शाला को अलौकिक रूप देने के लिए हर गृह की अलग-अलग वेदिकाओं का निर्माण किया गया है। इसमें राम महायज्ञ की सवा ग्यारह हजार आहुतियों के साथ ही निर्मित होने वाले महारुद्रों की पूर्णाहुति की आहुतियां भी दी जायेगी। यज्ञशाला के निर्माण के बारे में बताया कि 30 गुणा 30 की इस यज्ञ शाला को भव्यता देने के लिए ऊपर मंदिर का स्वरूप दिया गया है। इसमें अधिकतर सामग्री का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया गया है। बताया कि उनकी सहायता के यहां पर लगातार इलाहाबाद के निवासी संतोष कुमार उपाध्याय उनके साथ हैं।
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