मंगलवार, 14 जुलाई 2009

दो ही दिन में बन गये तीन करोड़ से ज्यादा महारुद्र

Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। इसे कहते हैं हर का हरि से मिलन व जीवात्मा का परमात्मा से मिलन और इस तरह की बातें किताबों से इतर धर्मनगरी चित्रकूट में आम हैं, तभी तो पं. आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा संकल्पित 45 वें सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण में पिछले सारे रिकार्ड उनके शिष्यों के साथ ही स्थानीय भक्तों ने तोड़ दिये। दो दिन में ही तीन करोड़ से ज्यादा शिव लिंगों का निर्माण करने के बाद भी तीसरे दिन लगभग एक करोड़ से ही ज्यादा शिव लिंग बनाने की बातें रैन बसेरा परिसर से निकल कर सामने आ रही है। दद्दा जी के भक्तों का कहना है कि शनिवार को सवा पांच करोड़ महारुद्रों का अभिषेक पूरा हो जायेगा।
उधर, सुबह पांच बजे से ही भगवान राम की शक्ति पूजा के साथ ही तप की स्थली के रुप में सुविख्यात इस धर्मस्थली के रैन बसेरा परिसर में ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ रुद्रों के निर्माण की प्रक्रिया जारी रही। आचार्य श्री के साथ उनके प्रमुख भक्त खुद ही व्यवस्थाओं को देखते रहे। यहां तक की दद्दा जी खुद ही भक्तों के बीच दिन भर मिट्टी की कटी हुई गोलियां बांटते नजर आये। यहां पर आये फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पूर्वी भट्ट,अरुंधती, फिल्म निर्माता कीर्ति कुमार, केवल कृष्ण, संगीतकार सुजीत चौबे तल्लीनता के साथ मूर्तियां बनाते हुये दिखाई दिये। इसके साथ ही श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियों को डालने का क्रम यज्ञ शाला में जारी रहा। उधर, एक पुराण को छह भागों में विभक्त कर एक-एक भाग को सुनाने का क्रम भी वेदों के आचार्यो द्वारा रामायण मेला परिसर के लोहिया सभागार में लगातार जारी है। यहां पर रखी गई शिव परिवार की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कल देर शाम दद्दा जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भारतीय संस्कृति की तीन आधार शिलायें हैं माता, पिता और गुरु का ऋण चुकाने के बाद ही मानव अपने जीवन में उरिण हो सकता है। इसलिये इन जिंदा ईश्वरों की आराधना करना ही सर्वोत्तम पूजा है। नई पीढ़ी के साथ राजनेताओं को संदेश देते हुये कहा कि आज की राजनीति में विश्वसनीयता की कमी है और राजनेता इसे अपने चारित्रिक समझ के द्वारा दूर कर सकते हैं। राजनीतिक स्तर पर विसंगतियां तभी दूर होंगी जब राजनेता वास्तव में सभी के कल्याण के काम करें। बाद में रुद्रों का विसर्जन वाल्मीकी नदी में किया गया। यहां पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, दीप राज राणा, ठाकुर पद्म सिंह, संतोष उपाध्याय, चंद्र पाल यादव, आदि ने आचार्यों के द्वारा बोले जा रहे मत्रोंत्चारों के बीच मूर्तियों को पवित्र नदी में

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