शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

सात लाख भाई बहनों का परिवार देखकर आशुतोष राणा के निकले आंसू

Jul 16, 10:29 pm
चित्रकूट। सात भाइयों और पांच बहनों के परिवार वाले को जब सात लाख भाई बहन मिल जायें तो हाल क्या होगा ? वह अपने आपको रोक नही पाये और गला रुंध गया। संकल्प पूर्ति महा महोत्सव की अंतिम वेला पर सभी गण मान्यों को सम्मानित करने के और सबका आभार प्रकट करने के बाद जब नम्बर सभी गुरु भाइयों व बहिनों से बात का अवसर आया तो फिल्म स्टार आशुतोष राणा का गला मंच पर ही भर आया। तीन से चार बार बोलने का प्रयास किया पर वे सफल हो न सके। आंसू भी छिपाने का प्रयास किया पर वे भी सभी को दिख ही गये। उन्होंने कहा कि मुझे अपने परिवार में सात भाई और पांच बहनें मिली पर दद्दा जी हमें सात लाख भाई और बहन दे दिये। इसकी खुशी शब्दों में बयान नही की जा सकती।
उन्होंने कहा कि जैसे माला 108 मनकों की होती है वैसे ही यज्ञों की श्रंखला भी कम से कम 108 तक पहुंचनी चाहिये। 45 यज्ञों में इन्हें विश्राम न दें। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में पैंतालीस पार्थिव महारुद्र निर्माण की प्रक्रिया में अब तक 1 अरब 19 करोड़, 23 लाख, 93 हजार और 674 पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण हो चुका है। बताया कि अभी तक के हुये केवल एक यज्ञ में उन्होंने आहुति नही डाली बाकी सभी चौवालीस यज्ञों में आहुति डालने का काम उन्होंने किया।
इस दौरान फिल्म अभिनेता राज पाल यादव ने भी विचार व्यक्त करते हुये कहा कि उनकी सफलता की कहानी दद्दा जी के शिष्य बनने के बाद से शुरु हुई। वर्ष 1999 में उन्होंने दद्दा जी से दीक्षा ली और उसी समय जंगल मिली और उस जंगल फिल्म ने उनके जीवन में मंगल कर दिया। इस दौरान दद्दा जी के पुत्र प्रो. अनिल त्रिपाठी, विधायक संजय पाठक आदि ने भी संबोधित किया। जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने भी संबोधित किया।
इसके पूर्व रोजाना की तरह की शिव लिंगों के निर्माण का काम जारी रहा। लोगों ने बड़ी संख्या में जाकर पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण किया। बाद में उनका विसर्जन किया गया।

लक्ष्य से बहुत आगे निकल गये शिव भक्त

Jul 16, 10:30 pm
चित्रकूट। दस दिनों तक लोगों को शिव भक्ति के रंग में रंगने वाला संकल्प पूर्ति महा महोत्सव गुरुवार को पूरा हो गया। यहां के लोग भी भोले बाबा की भक्ति में इस कदर डूबे कि उन्होंने सवा पांच करोड़ शिवलिंग बनाने के लक्ष्य को बहुत पीछे छोड़ दिया। इस महोत्सव में 9 करोड़, 54 लाख, 58 हजार, 633 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण हुआ।
महोत्सव के अंतिम दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने अपने आधे घंटे के उद्बोधन में कहा कि गुरु की आज्ञा को शिरोधार्य कर उन्होंने 9 के अंक के साथ ही चित्रकूट की इस पावन धरती पर अपनी महारुद्र निर्माण की यात्रा को विराम देने का निश्चय किया। हालांकि माता, पिता और गुरु के बाद पुत्र ऋण के कारण वे अभी ऐसा पूरी तौर पर नही कर पा रहे हैं। शिष्यों की इच्छा पर पार्थिव शिव लिंगों के निर्माण की प्रक्रिया लगातार देश के विभिन्न भागों में चलती रहेगी। कहा कि कर्म, धर्म और अर्पण का भाव अगर हो तो प्रभु को पूजने के लिए मंदिर जाना पड़ेगा पर समर्पण का भाव होने पर प्रभु खुद घर में बने मंदिर में विराजमान हो जायेंगे। नरसिंग मेहता, संत तुकाराम, विट्ठल नाथ, नामदेव जैसे तमाम उदाहरण देकर बताया कि समर्पण ही भक्ति की पराकाष्ठा है। अभिमान की शून्यता व्यक्ति को परमात्मा के नजदीक ले जाने का प्रमुख माध्यम है। मन की शून्यता और शुद्धता पाकर प्रभु स्वयं ही भक्त के पास चले आते हैं। हनुमान और प्रहलाद जैसे तमाम उदाहरण हैं जहां भगवान से भक्त काफी बढ़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मन के अहंकार को तन तक लाने का प्रयास करना चाहिये जिससे मकान के किनारे आने पर बेकार की वस्तु को धक्का मारकर बाहर किया जा सके। इसके पूर्व उन्होंने पद्मश्री नाना जी देशमुख को शाल और श्री फल देकर सम्मानित किया। इस दौरान जिलाधिकारी हृदेश कुमार व सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी राम भाई गोकानी को भी शाल श्री फल सौंपा गया।

गुरुवार, 16 जुलाई 2009

वैष्णव भक्तों में चढ़ा शिव भक्ति का रंग

Jul 15, 10:29 pm
चित्रकूट। सावन का महीना और चित्रकूट जैसे तीर्थ में बाबा भोले का स्वरूपों के निर्माण के साथ ही पूजन। भले ही इस नगरी की ख्याति वैष्णव हो पर इन दिनों तो पूरी तरह से शिव भक्ति लोगों के सिर चढ़कर उनके शाक्त होने का सबूत दे रही है। ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ ही संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच महारुद्रों के निर्माण का काम करना अपने आपमें विशिष्ठ अनुभव है। तभी तो वीआईपी हो या फिर साधारण लोग यहां पर मूर्तियों को बनाने और उनके पूजन के संवरण लोभ से नहीं बच पाते।
सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये। सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। आशुतोष राणा, राज पाल यादव ने विसर्जन में भी भाग लिया।

मंगलवार, 14 जुलाई 2009

दो ही दिन में बन गये तीन करोड़ से ज्यादा महारुद्र

Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। इसे कहते हैं हर का हरि से मिलन व जीवात्मा का परमात्मा से मिलन और इस तरह की बातें किताबों से इतर धर्मनगरी चित्रकूट में आम हैं, तभी तो पं. आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा संकल्पित 45 वें सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण में पिछले सारे रिकार्ड उनके शिष्यों के साथ ही स्थानीय भक्तों ने तोड़ दिये। दो दिन में ही तीन करोड़ से ज्यादा शिव लिंगों का निर्माण करने के बाद भी तीसरे दिन लगभग एक करोड़ से ही ज्यादा शिव लिंग बनाने की बातें रैन बसेरा परिसर से निकल कर सामने आ रही है। दद्दा जी के भक्तों का कहना है कि शनिवार को सवा पांच करोड़ महारुद्रों का अभिषेक पूरा हो जायेगा।
उधर, सुबह पांच बजे से ही भगवान राम की शक्ति पूजा के साथ ही तप की स्थली के रुप में सुविख्यात इस धर्मस्थली के रैन बसेरा परिसर में ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ रुद्रों के निर्माण की प्रक्रिया जारी रही। आचार्य श्री के साथ उनके प्रमुख भक्त खुद ही व्यवस्थाओं को देखते रहे। यहां तक की दद्दा जी खुद ही भक्तों के बीच दिन भर मिट्टी की कटी हुई गोलियां बांटते नजर आये। यहां पर आये फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पूर्वी भट्ट,अरुंधती, फिल्म निर्माता कीर्ति कुमार, केवल कृष्ण, संगीतकार सुजीत चौबे तल्लीनता के साथ मूर्तियां बनाते हुये दिखाई दिये। इसके साथ ही श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियों को डालने का क्रम यज्ञ शाला में जारी रहा। उधर, एक पुराण को छह भागों में विभक्त कर एक-एक भाग को सुनाने का क्रम भी वेदों के आचार्यो द्वारा रामायण मेला परिसर के लोहिया सभागार में लगातार जारी है। यहां पर रखी गई शिव परिवार की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कल देर शाम दद्दा जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भारतीय संस्कृति की तीन आधार शिलायें हैं माता, पिता और गुरु का ऋण चुकाने के बाद ही मानव अपने जीवन में उरिण हो सकता है। इसलिये इन जिंदा ईश्वरों की आराधना करना ही सर्वोत्तम पूजा है। नई पीढ़ी के साथ राजनेताओं को संदेश देते हुये कहा कि आज की राजनीति में विश्वसनीयता की कमी है और राजनेता इसे अपने चारित्रिक समझ के द्वारा दूर कर सकते हैं। राजनीतिक स्तर पर विसंगतियां तभी दूर होंगी जब राजनेता वास्तव में सभी के कल्याण के काम करें। बाद में रुद्रों का विसर्जन वाल्मीकी नदी में किया गया। यहां पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, दीप राज राणा, ठाकुर पद्म सिंह, संतोष उपाध्याय, चंद्र पाल यादव, आदि ने आचार्यों के द्वारा बोले जा रहे मत्रोंत्चारों के बीच मूर्तियों को पवित्र नदी में

आम बन गये ग्लैमर वर्ड के सितारे

Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। ग्लैमरस वर्ड के कुछ सितारे यहां पर ऐसे भी है जो कैमरे के सामने चमकते तो हैं पर इस धरती पर आकर जब वे सेवा का भाव लिए भक्तों को पानी पिलाते और रुद्रों का निर्माण करते दिखते हैं तो लगता है कि वे 'आम' ही हैं।
दूरदर्शन के माध्यम से 'अपराधी कौन' 'स्त्री' के साथ ही स्टार प्लस में आने वाले 'जय मां दुर्गे' ,'शनिदेव' जैसे बडे़ बजट के सीरियलों में महत्वपूर्ण रोल कर चुकी अरुन्धति आर्या इन दिनों दस दिनों का अवकाश लेकर राम की नगरी में शिव की भक्ति में तल्लीनता से लगी हैं। नागपुर की मूल निवासिनी आर्या बताती हैं कि उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने के ख्वाब भी नही देखा था पर फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता ने उनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। भले ही अंतिम बीस के बाद बाहर कर दी गई पर अभिनेत्री बनने की दृढ़ इच्छा शक्ति ने आज उन्हें मायानगरी में मुकाम दे दिया है।
गुजराती रंगमंच के साथ अब हिंदी फिल्मों में भी अपनी जोर आजमाइश करने वाली पूर्वी भट्ट ने ड्रामा और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की उपाधि लेने के बाद बड़ौदा से जब मायानगरी का रुख किया तो अपनी मातृ भाषा के नाटकों को ही आधार बनाया। वैसे इसके पहले एक समाचार चैनल का भी अनुभव उनके पास था। मुम्बई में 'गूंगा बोले बहरा सांमरे' व 'नेता में याद आव्या' से पहचान ही नही बल्कि गुजराती थियेटर में जानी मानी हस्ती बन गई। इसके बाद उन्हें स्टार प्लस पर सीरियल हमारी देव रानी में छह भाभियों की ननद का रोल मिला। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने दद्दा जी की पहली बार फोटो देखी और अपने मित्रों के जरिये उनके विचार सुने तो उन्हें बिना देखे ही गुरु मान लिया। चित्रकूट के बारे में सुना और पढ़ा काफी है अब यहां पर आकर काफी आनंद का अनुभव हो रहा है।
हजारों औरतें मगर चुगली नहीं
संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहते हैं जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्में बनाने के लिए मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहे धारावाहिक छोटी बहू में वो सहायक निर्देशक हैं। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल की भी शूटिंग शुरू होगी।

हजारों औरतें एक साथ फिर भी चुगली नही- मनीषा ओझा

Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। अब फिल्मी दुनिया के लोग अंधविश्वास से ज्यादा आस्था में यकीन रखते हैं। पांच सालों के अंदर बाबा राम देव और आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री जी ने फिल्मी दुनिया ही क्या पूरे विश्व का माहौल बदल दिया। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहा जाता है कि जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्मों को फिल्मी लाइन की पहली सीढ़ी मानकर मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहा छोटी बहू भी उन्हीं के द्वारा असिस्ट डायरेक्टर के रुप में काम किया हुआ है। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल भी शूट होना चालू हो जायेगी।

हर काम होता है वैदिक मंत्रों के सहारे

Jul 10, 11:01 pm
चित्रकूट। कुछ ऐसा है यहां कि हर चीज अपनी विशिष्टता का अहसास कराती है। श्री राम रक्षा स्त्रोत मंत्रों की आहुतियों के दृश्य देखते ही बनते हैं। नौ गृहों के लिए बनायी गयी अलग-अलग वेदिकाओं पर श्रद्धालु बैठकर श्री राम महामंत्र पर आहुतियां देते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे उन आहुतियों को स्वयं श्री राम जी ही गृहण कर रहे हैं। इसके साथ ही पूजन वेदिकाओं की विशिष्टता भी देखते ही बनती है।
वेदिकाओं की विशिष्ठता का बोध नौ गृह, क्षेत्र पाल, लिड्तोभद्र मंडल, श्री गणेश पीठ, गौरी गणेश मंडल , सर्वतो भ्रद मंडल, षोडस भद्र, वास्तु मंडल, चतुष्पदिष्ट योगिनी आदि के चक्र मुख्य मंच के नीचे की ओर बनाये गये हैं। मुख्य कथा आचार्य पूरन महाराज बताते हैं कि इस पूजन में हर एक काम में पूरी तरह से वैदिक रीतियों का ध्यान रखा जा रहा है। यहां पर लगभग ढाई सौ की संख्या में आचार्य लगे हुए हैं। उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय हैं। मिट्टी में पानी डालते समय, उन्हें लोंदे की शक्ल देते समय के साथ ही मुख्य मूर्तियों को बनाते समय हर एक काम मंत्रों से ही हो रहा है। समय समय पर दद्दा जी खुद ही सभी को लगातार जांचते रहते हैं।