Jul 08, 11:03 pm
चित्रकूट। एक शिष्य का वादा गुरु के साथ और उसको पूरा करने की भूमि भी वह जिसे सदियों से तप करने वालों के साथ ही भगवान राम के आश्रय स्थल के रुप में पूरा विश्व जानता है। अपने गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज को किये गये वादे महारुद्र निर्माण की श्रंखला का यह अंतिम पैंतालीसवां संकल्प महा महोत्सव वास्तव में इतना विशेष हो गया कि जैसे रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा स्थल के आसपास पूरा नगर बस गया और इस तीर्थ क्षेत्र का पूरा वातावरण सावन के पावन महीने में भोले मय हो गया।
महामहोत्सव के शुरुआत में ही आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' साफ तौर पर अपने शिष्यों को कहा था कि वे इस पैंतालीसवें महारुद्र पूजन के बाद से उनके गुरु ऋण से मुक्त हो जायेंगे। बुधवार को सुबह से ही लगभग पचास हजार भक्तों ने मुख्य पंडाल पर डेरा जमा एक करोड़ रुद्रों का निर्माण कर डाला। इसके साथ ही मुम्बई से आये सुजीत ठाकुर व सागर से आये राम ठाकुर ने अपने भजनों से भक्तों के अंदर ऊर्जा को बनाये रखने में सहायता की। शाम को आठ बजे से रास लीला का आनंद वृन्दावन से आये बृजेश आदर्श राम लीला मंडल ने कराया। पूरे दिन भर की दिन चर्या को स्पष्ट करते हुए दद्दा जी के शिष्यों में प्रमुख आशुतोष राणा ने बताया कि प्रतिदिन शाम को पांच बजे लोई काटने का क्रम शुरू हो जायेगा और दूसरे दिन सुबह शिव लिंग निर्माण के प्रतिदिन के लक्ष्य की पूर्ति के बाद ही तुरंत ही उनका महारुद्राभिषेक विद्वान आचार्यो के द्वारा किया जायेगा। इसके बाद सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करेंगे व तत्पश्चात विसर्जन का कार्यक्रम होगा। लोई काटने के दौरान संगीतकार सुजीत चौबे व राम ठाकुर अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे व बीच-बीच में वेद पाठी ब्राह्मण वेदों की ऋचाओं का सस्वर गायन पाठ करेंगे। बताया कि यज्ञ शाला में सवा ग्यारह हजार आहुतियां डाली जायेगी। इसके साथ ही रामायण मेला परिसर में एक सौ आठ पुराणों को भी सजाया गया है। बताया कि यह कार्यक्रम सोलह जुलाई तक चलेगा। भले ही लक्ष्य की पूर्ति किसी भी दिन हो जाये पर ज्यादा रुद्रों के निर्माण से सभी का भला ही होगा।
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