गुरुवार, 9 जुलाई 2009

महारुद्रों के निर्माण के बाद ही खाया अन्न

Jul 08, 11:01 pm
चित्रकूट। 'राम काज कीन्हें बिना मोहि कहां विश्राम' भले ही यह चौपाई रामचरित मानस में हनुमान जी के लिए लिखी गयी हो पर धर्म नगरी में इस चौपाई को चरितार्थ करने में देश विदेश से आये भक्तों ने पूरा जोर लगा दिया। दिन की शुरुआत महारुद्रों के निर्माण से हुई और दोपहर ढलते-ढलते एक करोड़ में शिवलिंग बन गये। वैसे इस काम को अंजाम देने की पीछे की भावना भी एक ही थी कि वे न तो नाश्ता करेंगे और न ही भोजन।
कटनी शिष्य मंडल के मोहन लाल केशरवानी हों, कानपुर के रिटायर्ड फौजी एन बी सिंह चौहान या फिर सागर के एडवोकेट राम सेवक हों सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि वे दद्दा जी का संकल्प पूरा करने आये हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन उनकी बतायी हुई महारुद्रों के निर्माण की संख्या से ज्यादा मात्रा में वे रुद्रों का निर्माण करने में सहयोग करेंगे। कहा कि सभी भक्तों ने विचार कर ही यह निर्णय लिया है कि वे यहां पर बड़े भाग्य से आये हैं और महारुद्रों के निर्माण व पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करेंगे। लगभग पचास से साठ हजार क्षमता का भोजनालय सुबह से ही सूना पड़ा रहा और शाम तीन बजे के बाद ही लोग पूजन के बाद वहां पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही विसर्जन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गयी।

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