मंगलवार, 14 जुलाई 2009

शिवलिंगों में दिख रही कलात्मकता

Jul 11, 10:22 pm
चित्रकूट। एक भावना ऐसी जिसके वशीभूत होकर सभी दौड़े चले आये। निर्माण उसका जिसने सभी का निर्माण किया है और उसको निर्माण करने की प्रक्रिया भी ऐसी कि जैसे पुनरावृत्ति हो रही हो। मिट्टी की देह से निर्मित लोग मिट्टी से ही भोले बाबा का निर्माण कर रहे हैं और उनको बनाने की प्रक्रिया भी ऐसी कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।
मुम्बई से आई फाल्गुनी और जया ने बताया कि उन्होंने फाइन आर्ट में डिप्लोमा किया और उसके बाद उनकी शादी हो गयी। अपनी कला को भक्ति के माध्यम से दिखाने का मौका मिलने की बात पर कहती हैं कि यह तो सब सद्गुरु देव भगवान का प्रताप है कि जो उन्हें इस राम की कर्म भूमि पर बैठकर भगवान शंकर की आराधना करने का सुख प्राप्त हो रहा है। पटियाला से सुखविदर सिंह व उनकी धर्मपत्नी राजबीर कौर की भी अपनी अलग कहानी है। वे कहते हैं कि भगवान शंकर ही एक ऐसे देवता हैं जो केवल जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी मूर्ति को बनाने का सुख सावन के महीने में चित्रकूट में तो अद्भुत है। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा के विचार तो इस मामले में काफी सहज हैं। वे कहते हैं कि यह मामला पूरी तरह धन्यवाद का है। धन्यवाद उसका जिसने सारी सृष्टि बनाई है। मिट्टी की सहायता से भोले नाथ का शरीर मिट्टी से बनाये जाने को सब कुछ मिट्टी में मिल जाना बताते हुए कहते हैं कि यह तो परमात्मा का इस बात धन्यवाद है कि उन्होंने हमारा शरीर इतना खूबसूरत और अच्छा बनाया और उनको इसी बात का धन्यवाद है।

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