Jul 16, 10:29 pm
चित्रकूट। सात भाइयों और पांच बहनों के परिवार वाले को जब सात लाख भाई बहन मिल जायें तो हाल क्या होगा ? वह अपने आपको रोक नही पाये और गला रुंध गया। संकल्प पूर्ति महा महोत्सव की अंतिम वेला पर सभी गण मान्यों को सम्मानित करने के और सबका आभार प्रकट करने के बाद जब नम्बर सभी गुरु भाइयों व बहिनों से बात का अवसर आया तो फिल्म स्टार आशुतोष राणा का गला मंच पर ही भर आया। तीन से चार बार बोलने का प्रयास किया पर वे सफल हो न सके। आंसू भी छिपाने का प्रयास किया पर वे भी सभी को दिख ही गये। उन्होंने कहा कि मुझे अपने परिवार में सात भाई और पांच बहनें मिली पर दद्दा जी हमें सात लाख भाई और बहन दे दिये। इसकी खुशी शब्दों में बयान नही की जा सकती।
उन्होंने कहा कि जैसे माला 108 मनकों की होती है वैसे ही यज्ञों की श्रंखला भी कम से कम 108 तक पहुंचनी चाहिये। 45 यज्ञों में इन्हें विश्राम न दें। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में पैंतालीस पार्थिव महारुद्र निर्माण की प्रक्रिया में अब तक 1 अरब 19 करोड़, 23 लाख, 93 हजार और 674 पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण हो चुका है। बताया कि अभी तक के हुये केवल एक यज्ञ में उन्होंने आहुति नही डाली बाकी सभी चौवालीस यज्ञों में आहुति डालने का काम उन्होंने किया।
इस दौरान फिल्म अभिनेता राज पाल यादव ने भी विचार व्यक्त करते हुये कहा कि उनकी सफलता की कहानी दद्दा जी के शिष्य बनने के बाद से शुरु हुई। वर्ष 1999 में उन्होंने दद्दा जी से दीक्षा ली और उसी समय जंगल मिली और उस जंगल फिल्म ने उनके जीवन में मंगल कर दिया। इस दौरान दद्दा जी के पुत्र प्रो. अनिल त्रिपाठी, विधायक संजय पाठक आदि ने भी संबोधित किया। जिलाधिकारी ह्देश कुमार ने भी संबोधित किया।
इसके पूर्व रोजाना की तरह की शिव लिंगों के निर्माण का काम जारी रहा। लोगों ने बड़ी संख्या में जाकर पार्थिव शिव लिंगों का निर्माण किया। बाद में उनका विसर्जन किया गया।
शुक्रवार, 17 जुलाई 2009
लक्ष्य से बहुत आगे निकल गये शिव भक्त
Jul 16, 10:30 pm
चित्रकूट। दस दिनों तक लोगों को शिव भक्ति के रंग में रंगने वाला संकल्प पूर्ति महा महोत्सव गुरुवार को पूरा हो गया। यहां के लोग भी भोले बाबा की भक्ति में इस कदर डूबे कि उन्होंने सवा पांच करोड़ शिवलिंग बनाने के लक्ष्य को बहुत पीछे छोड़ दिया। इस महोत्सव में 9 करोड़, 54 लाख, 58 हजार, 633 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण हुआ।
महोत्सव के अंतिम दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने अपने आधे घंटे के उद्बोधन में कहा कि गुरु की आज्ञा को शिरोधार्य कर उन्होंने 9 के अंक के साथ ही चित्रकूट की इस पावन धरती पर अपनी महारुद्र निर्माण की यात्रा को विराम देने का निश्चय किया। हालांकि माता, पिता और गुरु के बाद पुत्र ऋण के कारण वे अभी ऐसा पूरी तौर पर नही कर पा रहे हैं। शिष्यों की इच्छा पर पार्थिव शिव लिंगों के निर्माण की प्रक्रिया लगातार देश के विभिन्न भागों में चलती रहेगी। कहा कि कर्म, धर्म और अर्पण का भाव अगर हो तो प्रभु को पूजने के लिए मंदिर जाना पड़ेगा पर समर्पण का भाव होने पर प्रभु खुद घर में बने मंदिर में विराजमान हो जायेंगे। नरसिंग मेहता, संत तुकाराम, विट्ठल नाथ, नामदेव जैसे तमाम उदाहरण देकर बताया कि समर्पण ही भक्ति की पराकाष्ठा है। अभिमान की शून्यता व्यक्ति को परमात्मा के नजदीक ले जाने का प्रमुख माध्यम है। मन की शून्यता और शुद्धता पाकर प्रभु स्वयं ही भक्त के पास चले आते हैं। हनुमान और प्रहलाद जैसे तमाम उदाहरण हैं जहां भगवान से भक्त काफी बढ़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मन के अहंकार को तन तक लाने का प्रयास करना चाहिये जिससे मकान के किनारे आने पर बेकार की वस्तु को धक्का मारकर बाहर किया जा सके। इसके पूर्व उन्होंने पद्मश्री नाना जी देशमुख को शाल और श्री फल देकर सम्मानित किया। इस दौरान जिलाधिकारी हृदेश कुमार व सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी राम भाई गोकानी को भी शाल श्री फल सौंपा गया।
चित्रकूट। दस दिनों तक लोगों को शिव भक्ति के रंग में रंगने वाला संकल्प पूर्ति महा महोत्सव गुरुवार को पूरा हो गया। यहां के लोग भी भोले बाबा की भक्ति में इस कदर डूबे कि उन्होंने सवा पांच करोड़ शिवलिंग बनाने के लक्ष्य को बहुत पीछे छोड़ दिया। इस महोत्सव में 9 करोड़, 54 लाख, 58 हजार, 633 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण हुआ।
महोत्सव के अंतिम दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने अपने आधे घंटे के उद्बोधन में कहा कि गुरु की आज्ञा को शिरोधार्य कर उन्होंने 9 के अंक के साथ ही चित्रकूट की इस पावन धरती पर अपनी महारुद्र निर्माण की यात्रा को विराम देने का निश्चय किया। हालांकि माता, पिता और गुरु के बाद पुत्र ऋण के कारण वे अभी ऐसा पूरी तौर पर नही कर पा रहे हैं। शिष्यों की इच्छा पर पार्थिव शिव लिंगों के निर्माण की प्रक्रिया लगातार देश के विभिन्न भागों में चलती रहेगी। कहा कि कर्म, धर्म और अर्पण का भाव अगर हो तो प्रभु को पूजने के लिए मंदिर जाना पड़ेगा पर समर्पण का भाव होने पर प्रभु खुद घर में बने मंदिर में विराजमान हो जायेंगे। नरसिंग मेहता, संत तुकाराम, विट्ठल नाथ, नामदेव जैसे तमाम उदाहरण देकर बताया कि समर्पण ही भक्ति की पराकाष्ठा है। अभिमान की शून्यता व्यक्ति को परमात्मा के नजदीक ले जाने का प्रमुख माध्यम है। मन की शून्यता और शुद्धता पाकर प्रभु स्वयं ही भक्त के पास चले आते हैं। हनुमान और प्रहलाद जैसे तमाम उदाहरण हैं जहां भगवान से भक्त काफी बढ़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मन के अहंकार को तन तक लाने का प्रयास करना चाहिये जिससे मकान के किनारे आने पर बेकार की वस्तु को धक्का मारकर बाहर किया जा सके। इसके पूर्व उन्होंने पद्मश्री नाना जी देशमुख को शाल और श्री फल देकर सम्मानित किया। इस दौरान जिलाधिकारी हृदेश कुमार व सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी राम भाई गोकानी को भी शाल श्री फल सौंपा गया।
गुरुवार, 16 जुलाई 2009
वैष्णव भक्तों में चढ़ा शिव भक्ति का रंग
Jul 15, 10:29 pm
चित्रकूट। सावन का महीना और चित्रकूट जैसे तीर्थ में बाबा भोले का स्वरूपों के निर्माण के साथ ही पूजन। भले ही इस नगरी की ख्याति वैष्णव हो पर इन दिनों तो पूरी तरह से शिव भक्ति लोगों के सिर चढ़कर उनके शाक्त होने का सबूत दे रही है। ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ ही संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच महारुद्रों के निर्माण का काम करना अपने आपमें विशिष्ठ अनुभव है। तभी तो वीआईपी हो या फिर साधारण लोग यहां पर मूर्तियों को बनाने और उनके पूजन के संवरण लोभ से नहीं बच पाते।
सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये। सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। आशुतोष राणा, राज पाल यादव ने विसर्जन में भी भाग लिया।
चित्रकूट। सावन का महीना और चित्रकूट जैसे तीर्थ में बाबा भोले का स्वरूपों के निर्माण के साथ ही पूजन। भले ही इस नगरी की ख्याति वैष्णव हो पर इन दिनों तो पूरी तरह से शिव भक्ति लोगों के सिर चढ़कर उनके शाक्त होने का सबूत दे रही है। ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ ही संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच महारुद्रों के निर्माण का काम करना अपने आपमें विशिष्ठ अनुभव है। तभी तो वीआईपी हो या फिर साधारण लोग यहां पर मूर्तियों को बनाने और उनके पूजन के संवरण लोभ से नहीं बच पाते।
सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये। सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। आशुतोष राणा, राज पाल यादव ने विसर्जन में भी भाग लिया।
मंगलवार, 14 जुलाई 2009
दो ही दिन में बन गये तीन करोड़ से ज्यादा महारुद्र
Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। इसे कहते हैं हर का हरि से मिलन व जीवात्मा का परमात्मा से मिलन और इस तरह की बातें किताबों से इतर धर्मनगरी चित्रकूट में आम हैं, तभी तो पं. आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा संकल्पित 45 वें सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण में पिछले सारे रिकार्ड उनके शिष्यों के साथ ही स्थानीय भक्तों ने तोड़ दिये। दो दिन में ही तीन करोड़ से ज्यादा शिव लिंगों का निर्माण करने के बाद भी तीसरे दिन लगभग एक करोड़ से ही ज्यादा शिव लिंग बनाने की बातें रैन बसेरा परिसर से निकल कर सामने आ रही है। दद्दा जी के भक्तों का कहना है कि शनिवार को सवा पांच करोड़ महारुद्रों का अभिषेक पूरा हो जायेगा।
उधर, सुबह पांच बजे से ही भगवान राम की शक्ति पूजा के साथ ही तप की स्थली के रुप में सुविख्यात इस धर्मस्थली के रैन बसेरा परिसर में ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ रुद्रों के निर्माण की प्रक्रिया जारी रही। आचार्य श्री के साथ उनके प्रमुख भक्त खुद ही व्यवस्थाओं को देखते रहे। यहां तक की दद्दा जी खुद ही भक्तों के बीच दिन भर मिट्टी की कटी हुई गोलियां बांटते नजर आये। यहां पर आये फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पूर्वी भट्ट,अरुंधती, फिल्म निर्माता कीर्ति कुमार, केवल कृष्ण, संगीतकार सुजीत चौबे तल्लीनता के साथ मूर्तियां बनाते हुये दिखाई दिये। इसके साथ ही श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियों को डालने का क्रम यज्ञ शाला में जारी रहा। उधर, एक पुराण को छह भागों में विभक्त कर एक-एक भाग को सुनाने का क्रम भी वेदों के आचार्यो द्वारा रामायण मेला परिसर के लोहिया सभागार में लगातार जारी है। यहां पर रखी गई शिव परिवार की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कल देर शाम दद्दा जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भारतीय संस्कृति की तीन आधार शिलायें हैं माता, पिता और गुरु का ऋण चुकाने के बाद ही मानव अपने जीवन में उरिण हो सकता है। इसलिये इन जिंदा ईश्वरों की आराधना करना ही सर्वोत्तम पूजा है। नई पीढ़ी के साथ राजनेताओं को संदेश देते हुये कहा कि आज की राजनीति में विश्वसनीयता की कमी है और राजनेता इसे अपने चारित्रिक समझ के द्वारा दूर कर सकते हैं। राजनीतिक स्तर पर विसंगतियां तभी दूर होंगी जब राजनेता वास्तव में सभी के कल्याण के काम करें। बाद में रुद्रों का विसर्जन वाल्मीकी नदी में किया गया। यहां पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, दीप राज राणा, ठाकुर पद्म सिंह, संतोष उपाध्याय, चंद्र पाल यादव, आदि ने आचार्यों के द्वारा बोले जा रहे मत्रोंत्चारों के बीच मूर्तियों को पवित्र नदी में
चित्रकूट। इसे कहते हैं हर का हरि से मिलन व जीवात्मा का परमात्मा से मिलन और इस तरह की बातें किताबों से इतर धर्मनगरी चित्रकूट में आम हैं, तभी तो पं. आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा संकल्पित 45 वें सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण में पिछले सारे रिकार्ड उनके शिष्यों के साथ ही स्थानीय भक्तों ने तोड़ दिये। दो दिन में ही तीन करोड़ से ज्यादा शिव लिंगों का निर्माण करने के बाद भी तीसरे दिन लगभग एक करोड़ से ही ज्यादा शिव लिंग बनाने की बातें रैन बसेरा परिसर से निकल कर सामने आ रही है। दद्दा जी के भक्तों का कहना है कि शनिवार को सवा पांच करोड़ महारुद्रों का अभिषेक पूरा हो जायेगा।
उधर, सुबह पांच बजे से ही भगवान राम की शक्ति पूजा के साथ ही तप की स्थली के रुप में सुविख्यात इस धर्मस्थली के रैन बसेरा परिसर में ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ रुद्रों के निर्माण की प्रक्रिया जारी रही। आचार्य श्री के साथ उनके प्रमुख भक्त खुद ही व्यवस्थाओं को देखते रहे। यहां तक की दद्दा जी खुद ही भक्तों के बीच दिन भर मिट्टी की कटी हुई गोलियां बांटते नजर आये। यहां पर आये फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पूर्वी भट्ट,अरुंधती, फिल्म निर्माता कीर्ति कुमार, केवल कृष्ण, संगीतकार सुजीत चौबे तल्लीनता के साथ मूर्तियां बनाते हुये दिखाई दिये। इसके साथ ही श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियों को डालने का क्रम यज्ञ शाला में जारी रहा। उधर, एक पुराण को छह भागों में विभक्त कर एक-एक भाग को सुनाने का क्रम भी वेदों के आचार्यो द्वारा रामायण मेला परिसर के लोहिया सभागार में लगातार जारी है। यहां पर रखी गई शिव परिवार की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
कल देर शाम दद्दा जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भारतीय संस्कृति की तीन आधार शिलायें हैं माता, पिता और गुरु का ऋण चुकाने के बाद ही मानव अपने जीवन में उरिण हो सकता है। इसलिये इन जिंदा ईश्वरों की आराधना करना ही सर्वोत्तम पूजा है। नई पीढ़ी के साथ राजनेताओं को संदेश देते हुये कहा कि आज की राजनीति में विश्वसनीयता की कमी है और राजनेता इसे अपने चारित्रिक समझ के द्वारा दूर कर सकते हैं। राजनीतिक स्तर पर विसंगतियां तभी दूर होंगी जब राजनेता वास्तव में सभी के कल्याण के काम करें। बाद में रुद्रों का विसर्जन वाल्मीकी नदी में किया गया। यहां पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, दीप राज राणा, ठाकुर पद्म सिंह, संतोष उपाध्याय, चंद्र पाल यादव, आदि ने आचार्यों के द्वारा बोले जा रहे मत्रोंत्चारों के बीच मूर्तियों को पवित्र नदी में
आम बन गये ग्लैमर वर्ड के सितारे
Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। ग्लैमरस वर्ड के कुछ सितारे यहां पर ऐसे भी है जो कैमरे के सामने चमकते तो हैं पर इस धरती पर आकर जब वे सेवा का भाव लिए भक्तों को पानी पिलाते और रुद्रों का निर्माण करते दिखते हैं तो लगता है कि वे 'आम' ही हैं।
दूरदर्शन के माध्यम से 'अपराधी कौन' 'स्त्री' के साथ ही स्टार प्लस में आने वाले 'जय मां दुर्गे' ,'शनिदेव' जैसे बडे़ बजट के सीरियलों में महत्वपूर्ण रोल कर चुकी अरुन्धति आर्या इन दिनों दस दिनों का अवकाश लेकर राम की नगरी में शिव की भक्ति में तल्लीनता से लगी हैं। नागपुर की मूल निवासिनी आर्या बताती हैं कि उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने के ख्वाब भी नही देखा था पर फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता ने उनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। भले ही अंतिम बीस के बाद बाहर कर दी गई पर अभिनेत्री बनने की दृढ़ इच्छा शक्ति ने आज उन्हें मायानगरी में मुकाम दे दिया है।
गुजराती रंगमंच के साथ अब हिंदी फिल्मों में भी अपनी जोर आजमाइश करने वाली पूर्वी भट्ट ने ड्रामा और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की उपाधि लेने के बाद बड़ौदा से जब मायानगरी का रुख किया तो अपनी मातृ भाषा के नाटकों को ही आधार बनाया। वैसे इसके पहले एक समाचार चैनल का भी अनुभव उनके पास था। मुम्बई में 'गूंगा बोले बहरा सांमरे' व 'नेता में याद आव्या' से पहचान ही नही बल्कि गुजराती थियेटर में जानी मानी हस्ती बन गई। इसके बाद उन्हें स्टार प्लस पर सीरियल हमारी देव रानी में छह भाभियों की ननद का रोल मिला। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने दद्दा जी की पहली बार फोटो देखी और अपने मित्रों के जरिये उनके विचार सुने तो उन्हें बिना देखे ही गुरु मान लिया। चित्रकूट के बारे में सुना और पढ़ा काफी है अब यहां पर आकर काफी आनंद का अनुभव हो रहा है।
हजारों औरतें मगर चुगली नहीं
संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहते हैं जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्में बनाने के लिए मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहे धारावाहिक छोटी बहू में वो सहायक निर्देशक हैं। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल की भी शूटिंग शुरू होगी।
चित्रकूट। ग्लैमरस वर्ड के कुछ सितारे यहां पर ऐसे भी है जो कैमरे के सामने चमकते तो हैं पर इस धरती पर आकर जब वे सेवा का भाव लिए भक्तों को पानी पिलाते और रुद्रों का निर्माण करते दिखते हैं तो लगता है कि वे 'आम' ही हैं।
दूरदर्शन के माध्यम से 'अपराधी कौन' 'स्त्री' के साथ ही स्टार प्लस में आने वाले 'जय मां दुर्गे' ,'शनिदेव' जैसे बडे़ बजट के सीरियलों में महत्वपूर्ण रोल कर चुकी अरुन्धति आर्या इन दिनों दस दिनों का अवकाश लेकर राम की नगरी में शिव की भक्ति में तल्लीनता से लगी हैं। नागपुर की मूल निवासिनी आर्या बताती हैं कि उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने के ख्वाब भी नही देखा था पर फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता ने उनके जीवन की दिशा को ही बदल दिया। भले ही अंतिम बीस के बाद बाहर कर दी गई पर अभिनेत्री बनने की दृढ़ इच्छा शक्ति ने आज उन्हें मायानगरी में मुकाम दे दिया है।
गुजराती रंगमंच के साथ अब हिंदी फिल्मों में भी अपनी जोर आजमाइश करने वाली पूर्वी भट्ट ने ड्रामा और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की उपाधि लेने के बाद बड़ौदा से जब मायानगरी का रुख किया तो अपनी मातृ भाषा के नाटकों को ही आधार बनाया। वैसे इसके पहले एक समाचार चैनल का भी अनुभव उनके पास था। मुम्बई में 'गूंगा बोले बहरा सांमरे' व 'नेता में याद आव्या' से पहचान ही नही बल्कि गुजराती थियेटर में जानी मानी हस्ती बन गई। इसके बाद उन्हें स्टार प्लस पर सीरियल हमारी देव रानी में छह भाभियों की ननद का रोल मिला। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने दद्दा जी की पहली बार फोटो देखी और अपने मित्रों के जरिये उनके विचार सुने तो उन्हें बिना देखे ही गुरु मान लिया। चित्रकूट के बारे में सुना और पढ़ा काफी है अब यहां पर आकर काफी आनंद का अनुभव हो रहा है।
हजारों औरतें मगर चुगली नहीं
संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहते हैं जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्में बनाने के लिए मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहे धारावाहिक छोटी बहू में वो सहायक निर्देशक हैं। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल की भी शूटिंग शुरू होगी।
हजारों औरतें एक साथ फिर भी चुगली नही- मनीषा ओझा
Jul 10, 11:00 pm
चित्रकूट। अब फिल्मी दुनिया के लोग अंधविश्वास से ज्यादा आस्था में यकीन रखते हैं। पांच सालों के अंदर बाबा राम देव और आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री जी ने फिल्मी दुनिया ही क्या पूरे विश्व का माहौल बदल दिया। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहा जाता है कि जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्मों को फिल्मी लाइन की पहली सीढ़ी मानकर मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहा छोटी बहू भी उन्हीं के द्वारा असिस्ट डायरेक्टर के रुप में काम किया हुआ है। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल भी शूट होना चालू हो जायेगी।
चित्रकूट। अब फिल्मी दुनिया के लोग अंधविश्वास से ज्यादा आस्था में यकीन रखते हैं। पांच सालों के अंदर बाबा राम देव और आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री जी ने फिल्मी दुनिया ही क्या पूरे विश्व का माहौल बदल दिया। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में अपनी मां शान्ती ओझा के साथ आई फिल्म डायरेक्टर मनीषा ओझा ने कहा कि यहां की सबसे कड़ी बात आचार्य जी ने एक बड़ा मिथक तोड़ दिया। कहा जाता है कि जहां चार औरतें बैठती हैं वहां चुगली होती है और यहां तो हजारों की संख्या में बैठी औरतें ऊं नम:शिवाय का जाप कर रही हैं।
शाहरुख खान,ऋतिक रोशन, सैफ अली खान जैसे सितारों से अपनी कल्पना के अनुसार अभिनय कराने वाली मूल रुप से बिहार की रहने वाली मनीषा ओझा ने जब फिल्म डायरेक्शन का ख्वाब देखा तो घर वालों ने कड़ा ऐतराज किया पर कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेकर एड फिल्मों को फिल्मी लाइन की पहली सीढ़ी मानकर मुम्बई पहुंची तो पहला ही एड वाकर सिरीज का मिला और सामने थे ऋत्विक रोशन। फिर क्या था काम्पैक्ट लैपटाप में शाहरुख खान और ताजमहल में सैफ अली खान के साथ ही क्रिकेट जगत के एम एस धोनी, सचिन तेंदुलकर, लियंडर पेस जैसे सितारों से अभिनय कराने वाली असिस्टेंट मुख्य निर्देशक मनीषा ओझा का सपना अब मुम्बई में खुद का प्रोडेक्शन हाउस खोलने का है। इसके साथ ही सोनी टीवी पर चल रहा छोटी बहू भी उन्हीं के द्वारा असिस्ट डायरेक्टर के रुप में काम किया हुआ है। बताया कि अगस्त से बलराज फिल्म्स की गोल्डेन टेम्पल भी शूट होना चालू हो जायेगी।
हर काम होता है वैदिक मंत्रों के सहारे
Jul 10, 11:01 pm
चित्रकूट। कुछ ऐसा है यहां कि हर चीज अपनी विशिष्टता का अहसास कराती है। श्री राम रक्षा स्त्रोत मंत्रों की आहुतियों के दृश्य देखते ही बनते हैं। नौ गृहों के लिए बनायी गयी अलग-अलग वेदिकाओं पर श्रद्धालु बैठकर श्री राम महामंत्र पर आहुतियां देते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे उन आहुतियों को स्वयं श्री राम जी ही गृहण कर रहे हैं। इसके साथ ही पूजन वेदिकाओं की विशिष्टता भी देखते ही बनती है।
वेदिकाओं की विशिष्ठता का बोध नौ गृह, क्षेत्र पाल, लिड्तोभद्र मंडल, श्री गणेश पीठ, गौरी गणेश मंडल , सर्वतो भ्रद मंडल, षोडस भद्र, वास्तु मंडल, चतुष्पदिष्ट योगिनी आदि के चक्र मुख्य मंच के नीचे की ओर बनाये गये हैं। मुख्य कथा आचार्य पूरन महाराज बताते हैं कि इस पूजन में हर एक काम में पूरी तरह से वैदिक रीतियों का ध्यान रखा जा रहा है। यहां पर लगभग ढाई सौ की संख्या में आचार्य लगे हुए हैं। उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय हैं। मिट्टी में पानी डालते समय, उन्हें लोंदे की शक्ल देते समय के साथ ही मुख्य मूर्तियों को बनाते समय हर एक काम मंत्रों से ही हो रहा है। समय समय पर दद्दा जी खुद ही सभी को लगातार जांचते रहते हैं।
चित्रकूट। कुछ ऐसा है यहां कि हर चीज अपनी विशिष्टता का अहसास कराती है। श्री राम रक्षा स्त्रोत मंत्रों की आहुतियों के दृश्य देखते ही बनते हैं। नौ गृहों के लिए बनायी गयी अलग-अलग वेदिकाओं पर श्रद्धालु बैठकर श्री राम महामंत्र पर आहुतियां देते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे उन आहुतियों को स्वयं श्री राम जी ही गृहण कर रहे हैं। इसके साथ ही पूजन वेदिकाओं की विशिष्टता भी देखते ही बनती है।
वेदिकाओं की विशिष्ठता का बोध नौ गृह, क्षेत्र पाल, लिड्तोभद्र मंडल, श्री गणेश पीठ, गौरी गणेश मंडल , सर्वतो भ्रद मंडल, षोडस भद्र, वास्तु मंडल, चतुष्पदिष्ट योगिनी आदि के चक्र मुख्य मंच के नीचे की ओर बनाये गये हैं। मुख्य कथा आचार्य पूरन महाराज बताते हैं कि इस पूजन में हर एक काम में पूरी तरह से वैदिक रीतियों का ध्यान रखा जा रहा है। यहां पर लगभग ढाई सौ की संख्या में आचार्य लगे हुए हैं। उनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां तय हैं। मिट्टी में पानी डालते समय, उन्हें लोंदे की शक्ल देते समय के साथ ही मुख्य मूर्तियों को बनाते समय हर एक काम मंत्रों से ही हो रहा है। समय समय पर दद्दा जी खुद ही सभी को लगातार जांचते रहते हैं।
सन्मार्ग पर चलने की राह दिखाते संत : आशुतोष
Jul 11, 10:21 pm
चित्रकूट। संत महंत तपस्थली की शान और हमारा गौरव हैं। ये भगवत भक्ति के साथ व्यक्ति को सन्मार्ग में चलने की सही राह दिखाते हैं। हम इनका सम्मान कर अपने आपको कृतार्थ महसूस करते हैं। यह बात फिल्म स्टार आशुतोष राणा ने संकल्प पूर्ति महोत्सव में कही।
महोत्सव के चौथे दिन कथा मंडप में निर्वाणी निर्मोही अखाडे़ के महंत स्वामी ओंकार दास का आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने सम्मान कर श्री फल व अंग वस्त्र प्रदान किया। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व राजपाल यादव ने भी महंत श्री से आशीर्वाद लिया। महंत जी के दोबारा बुलावे पर दोनों फिल्मी सितारों ने यहां बार-बार आने की बात कही। जिलाधिकारी भी रुद्र निर्माण स्थल पर पत्नी के साथ पहुंचे और रुद्र बनाने के साथ ही हवन-पूजन किया। उधर, तीर्थक्षेत्र के मंदिरों से प्रात:काल के घंटों-घड़ियालों की आवाजों के साथ ही रुद्रों को बनाने का क्रम भी शुरू हो गया। जहां एक तरफ लोग रुद्रों का निर्माण कर अपने आपको कृतार्थ करने में लगे थे वहीं दूसरी तरफ दद्दा शिष्य मंडल के सेवादार मिट्टी की गोलियां, परात, चावल, पुष्प, पूजन सामग्री के साथ ही पानी व शरबत पिलाने का काम कर रहे थे। दोपहर दो बजे तक रुद्रों के निर्माण के बाद आचार्य पूरन महाराज ने सभी भक्तों से महारुद्राभिषेक करवाया। बाद में इन रुद्रों को ट्रकों पर लादकर तुलसी तीर्थ राजापुर ले जाया गया जहां पर पवित्र यमुना में उन्हें विसर्जित कर दिया गया। इसके साथ ही यज्ञ शाला में दोपहर बाद से ही आहुतियों को डालने का क्रम जारी रहा। फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के भजनों के दौरान काफी देर तक लोग झूमते रहे। एक दौर ऐसा भी आया कि राजपाल यादव भी नाचते-नाचते मंच के सामने पहुंच गये और काफी देर तक नृत्य करते रहे। महिलाएं उनके साथ नाचने के लिए पहुंची।
चित्रकूट। संत महंत तपस्थली की शान और हमारा गौरव हैं। ये भगवत भक्ति के साथ व्यक्ति को सन्मार्ग में चलने की सही राह दिखाते हैं। हम इनका सम्मान कर अपने आपको कृतार्थ महसूस करते हैं। यह बात फिल्म स्टार आशुतोष राणा ने संकल्प पूर्ति महोत्सव में कही।
महोत्सव के चौथे दिन कथा मंडप में निर्वाणी निर्मोही अखाडे़ के महंत स्वामी ओंकार दास का आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री ने सम्मान कर श्री फल व अंग वस्त्र प्रदान किया। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व राजपाल यादव ने भी महंत श्री से आशीर्वाद लिया। महंत जी के दोबारा बुलावे पर दोनों फिल्मी सितारों ने यहां बार-बार आने की बात कही। जिलाधिकारी भी रुद्र निर्माण स्थल पर पत्नी के साथ पहुंचे और रुद्र बनाने के साथ ही हवन-पूजन किया। उधर, तीर्थक्षेत्र के मंदिरों से प्रात:काल के घंटों-घड़ियालों की आवाजों के साथ ही रुद्रों को बनाने का क्रम भी शुरू हो गया। जहां एक तरफ लोग रुद्रों का निर्माण कर अपने आपको कृतार्थ करने में लगे थे वहीं दूसरी तरफ दद्दा शिष्य मंडल के सेवादार मिट्टी की गोलियां, परात, चावल, पुष्प, पूजन सामग्री के साथ ही पानी व शरबत पिलाने का काम कर रहे थे। दोपहर दो बजे तक रुद्रों के निर्माण के बाद आचार्य पूरन महाराज ने सभी भक्तों से महारुद्राभिषेक करवाया। बाद में इन रुद्रों को ट्रकों पर लादकर तुलसी तीर्थ राजापुर ले जाया गया जहां पर पवित्र यमुना में उन्हें विसर्जित कर दिया गया। इसके साथ ही यज्ञ शाला में दोपहर बाद से ही आहुतियों को डालने का क्रम जारी रहा। फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के भजनों के दौरान काफी देर तक लोग झूमते रहे। एक दौर ऐसा भी आया कि राजपाल यादव भी नाचते-नाचते मंच के सामने पहुंच गये और काफी देर तक नृत्य करते रहे। महिलाएं उनके साथ नाचने के लिए पहुंची।
बुंदेली विधाओं पर झूम उठे लोग
Jul 11, 10:21 pm
चित्रकूट। भले ही यहां पर संकल्पपूर्ति महामहोत्सव मनाया जा रहा हो पर देश के विभिन्न प्रदेशों से आये लोग अपनी-अपनी संस्कृति की झांकी दिखा रहे हैं। जब मंच के माध्यम से लोक संस्कृति के धनी बुंदेलखंड की विशेष प्रस्तुतियां हुईं तो लोग झूमकर नाचने लगे। इनकी सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्हें भक्ति के कलेवर में ढाल दिया गया था।
राई, फाग और लमटेरा, ढिमरयाई, लावनी और तमाम तरह की लगभग पांच सौ से भी ज्यादा लोक विधाओं के साथ पूरे विश्व में अब विख्यात हो चुकी बुंदेली भाषा के साथ शाहपुर से आये सपेरा मंडल के साथ ही अन्य और जगहों से आये विभिन्न मंडलों की जोरदार प्रस्तुतियां देखने के फिल्म स्टार आशुतोष राणा खुद हतप्रद थे। यही हाल फिल्म अभिनेता राज पाल राणा और ठाकुर पद्म सिंह के रहे। वैसे तो फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व ठाकुर पद्म सिंह सीधे तौर पर बुंदेलखंड से ही ताल्लुक रखते हैं पर फिल्मों में आने से पहले आशुतोष अपने जन्म स्थान गाडरवाड़ा व सागर में राम लीलाओं के माध्यम से लोगों के सामने अपनी प्रस्तुतियां देते थे।
चित्रकूट। भले ही यहां पर संकल्पपूर्ति महामहोत्सव मनाया जा रहा हो पर देश के विभिन्न प्रदेशों से आये लोग अपनी-अपनी संस्कृति की झांकी दिखा रहे हैं। जब मंच के माध्यम से लोक संस्कृति के धनी बुंदेलखंड की विशेष प्रस्तुतियां हुईं तो लोग झूमकर नाचने लगे। इनकी सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्हें भक्ति के कलेवर में ढाल दिया गया था।
राई, फाग और लमटेरा, ढिमरयाई, लावनी और तमाम तरह की लगभग पांच सौ से भी ज्यादा लोक विधाओं के साथ पूरे विश्व में अब विख्यात हो चुकी बुंदेली भाषा के साथ शाहपुर से आये सपेरा मंडल के साथ ही अन्य और जगहों से आये विभिन्न मंडलों की जोरदार प्रस्तुतियां देखने के फिल्म स्टार आशुतोष राणा खुद हतप्रद थे। यही हाल फिल्म अभिनेता राज पाल राणा और ठाकुर पद्म सिंह के रहे। वैसे तो फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व ठाकुर पद्म सिंह सीधे तौर पर बुंदेलखंड से ही ताल्लुक रखते हैं पर फिल्मों में आने से पहले आशुतोष अपने जन्म स्थान गाडरवाड़ा व सागर में राम लीलाओं के माध्यम से लोगों के सामने अपनी प्रस्तुतियां देते थे।
शिवलिंगों में दिख रही कलात्मकता
Jul 11, 10:22 pm
चित्रकूट। एक भावना ऐसी जिसके वशीभूत होकर सभी दौड़े चले आये। निर्माण उसका जिसने सभी का निर्माण किया है और उसको निर्माण करने की प्रक्रिया भी ऐसी कि जैसे पुनरावृत्ति हो रही हो। मिट्टी की देह से निर्मित लोग मिट्टी से ही भोले बाबा का निर्माण कर रहे हैं और उनको बनाने की प्रक्रिया भी ऐसी कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।
मुम्बई से आई फाल्गुनी और जया ने बताया कि उन्होंने फाइन आर्ट में डिप्लोमा किया और उसके बाद उनकी शादी हो गयी। अपनी कला को भक्ति के माध्यम से दिखाने का मौका मिलने की बात पर कहती हैं कि यह तो सब सद्गुरु देव भगवान का प्रताप है कि जो उन्हें इस राम की कर्म भूमि पर बैठकर भगवान शंकर की आराधना करने का सुख प्राप्त हो रहा है। पटियाला से सुखविदर सिंह व उनकी धर्मपत्नी राजबीर कौर की भी अपनी अलग कहानी है। वे कहते हैं कि भगवान शंकर ही एक ऐसे देवता हैं जो केवल जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी मूर्ति को बनाने का सुख सावन के महीने में चित्रकूट में तो अद्भुत है। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा के विचार तो इस मामले में काफी सहज हैं। वे कहते हैं कि यह मामला पूरी तरह धन्यवाद का है। धन्यवाद उसका जिसने सारी सृष्टि बनाई है। मिट्टी की सहायता से भोले नाथ का शरीर मिट्टी से बनाये जाने को सब कुछ मिट्टी में मिल जाना बताते हुए कहते हैं कि यह तो परमात्मा का इस बात धन्यवाद है कि उन्होंने हमारा शरीर इतना खूबसूरत और अच्छा बनाया और उनको इसी बात का धन्यवाद है।
चित्रकूट। एक भावना ऐसी जिसके वशीभूत होकर सभी दौड़े चले आये। निर्माण उसका जिसने सभी का निर्माण किया है और उसको निर्माण करने की प्रक्रिया भी ऐसी कि जैसे पुनरावृत्ति हो रही हो। मिट्टी की देह से निर्मित लोग मिट्टी से ही भोले बाबा का निर्माण कर रहे हैं और उनको बनाने की प्रक्रिया भी ऐसी कि लोग दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं।
मुम्बई से आई फाल्गुनी और जया ने बताया कि उन्होंने फाइन आर्ट में डिप्लोमा किया और उसके बाद उनकी शादी हो गयी। अपनी कला को भक्ति के माध्यम से दिखाने का मौका मिलने की बात पर कहती हैं कि यह तो सब सद्गुरु देव भगवान का प्रताप है कि जो उन्हें इस राम की कर्म भूमि पर बैठकर भगवान शंकर की आराधना करने का सुख प्राप्त हो रहा है। पटियाला से सुखविदर सिंह व उनकी धर्मपत्नी राजबीर कौर की भी अपनी अलग कहानी है। वे कहते हैं कि भगवान शंकर ही एक ऐसे देवता हैं जो केवल जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी मूर्ति को बनाने का सुख सावन के महीने में चित्रकूट में तो अद्भुत है। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा के विचार तो इस मामले में काफी सहज हैं। वे कहते हैं कि यह मामला पूरी तरह धन्यवाद का है। धन्यवाद उसका जिसने सारी सृष्टि बनाई है। मिट्टी की सहायता से भोले नाथ का शरीर मिट्टी से बनाये जाने को सब कुछ मिट्टी में मिल जाना बताते हुए कहते हैं कि यह तो परमात्मा का इस बात धन्यवाद है कि उन्होंने हमारा शरीर इतना खूबसूरत और अच्छा बनाया और उनको इसी बात का धन्यवाद है।
धार्मिक गानों में ही मिलता सच्चा सुख
Jul 11, 10:22 pm
चित्रकूट। भले ही आज फिल्मी दुनिया में गाते बजाते पन्द्रह साल बीत गये हों और तमाम हिट फिल्मों में संगीत दिया हो पर सुख तो धार्मिक गानों को गाने में ही मिलता है। यह कहना है संगीतकार सुजीत चौबे का।
उनका कहना है सबसे ज्यादा सुख तो गुरुदेव के कार्यक्रमों में ही अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करने के बाद मिलता है। कहा कि कक्षा छह से संगीत की लगन लग गयी। सो बनारस घराने के पं. देवानंद पाठक को गुरु बना लिया। स्कूली शिक्षा के बाद जब आकाशवाणी से जुड़ गये। वर्ष 1996 में मुम्बई से पद्मा खन्ना का बुलावा आ गया। फिर वे जाकर मायानगरी में रमे तो उनके खाते में शबनम मौसी, राजा भैया, क्रांति वीर, परदेशी रे, गाड एंड गन, गंगोत्री के रुप में तमाम हिट फिल्में मिली। बाबा भोले नाथ की नगरी से भोजपुरी भाषा का जुड़ाव उनके खाते में यहां भी तमाम हिट फिल्मों को दिला गया। कभी बचपन में पिता जी के साथ चित्रकूट आने वाले सुजीत चौबे बताते हैं कि आशुतोष राणा से उनकी मुलाकात 1997 में मारीशस में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उनके बताने पर वह तभी से वह दद्दा जी के शिष्य बन गये।
चित्रकूट। भले ही आज फिल्मी दुनिया में गाते बजाते पन्द्रह साल बीत गये हों और तमाम हिट फिल्मों में संगीत दिया हो पर सुख तो धार्मिक गानों को गाने में ही मिलता है। यह कहना है संगीतकार सुजीत चौबे का।
उनका कहना है सबसे ज्यादा सुख तो गुरुदेव के कार्यक्रमों में ही अपने कार्यक्रम प्रस्तुत करने के बाद मिलता है। कहा कि कक्षा छह से संगीत की लगन लग गयी। सो बनारस घराने के पं. देवानंद पाठक को गुरु बना लिया। स्कूली शिक्षा के बाद जब आकाशवाणी से जुड़ गये। वर्ष 1996 में मुम्बई से पद्मा खन्ना का बुलावा आ गया। फिर वे जाकर मायानगरी में रमे तो उनके खाते में शबनम मौसी, राजा भैया, क्रांति वीर, परदेशी रे, गाड एंड गन, गंगोत्री के रुप में तमाम हिट फिल्में मिली। बाबा भोले नाथ की नगरी से भोजपुरी भाषा का जुड़ाव उनके खाते में यहां भी तमाम हिट फिल्मों को दिला गया। कभी बचपन में पिता जी के साथ चित्रकूट आने वाले सुजीत चौबे बताते हैं कि आशुतोष राणा से उनकी मुलाकात 1997 में मारीशस में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। उनके बताने पर वह तभी से वह दद्दा जी के शिष्य बन गये।
कलियुग केवल नाम अधारा
Jul 12, 10:34 pm
चित्रकूट। नर कर्म प्रधान है, नारी धर्म प्रधान है और नारायण मर्म प्रधान हैं। यह भाव ही अनुभूति का विषय है। यह बातें आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री ने रैन बसेरा परिसर में संकल्प पूर्ति महा महोत्सव में रविवार को देश विदेश से आये अपने तमाम शिष्यों को संबोधित करते करते हुये कहीं।
उन्होंने कहा कि विषयों से निजात पान का उपाय संतों की शरण में मिलता है। विषयों से वीतरागी संत अपने शिष्य को खूबसूरती से बाहर निकालकर उसे परमात्मा का साक्षात्कार करा देते हैं। फिर चित्रकूट जैसी वसुन्धरा जहां पर आदि काल से ही संतों का डेरा है वास्तव में महान हैं। यहां तो प्रभु के चरण सर्वत्र पड़े और उनकी चरण धूलि आज भी वातावरण में धूल बनकर टहल रही है। यहां आने वाला हर एक प्राणी कृतार्थ हो गया। आचार्य श्री ने संतों को साक्षात ईश्वर की उपाधि देते हुये कहा कि इनके दर्शनों से ही जीवन तर जाता है। बताया कि शायद वे विश्व के इकलौते ऐसे शिष्य होंगे जिसकी गुरु दीक्षा कारागार में हुई थी। उन दिनों में काशी में मंदिरों में हरिजनों के प्रवेश करने पर आंदोलन हुआ था जिसमें वे चार दिनों के लिये जेल गये थे। उन्होंने सपाट शब्दों में कहा कि परमात्मा अनुभूति का विषय है और अपने आपको जाने बिना परमात्मा का मर्म नही जाना जा सकता। व्यक्ति में बिना पात्रता आये भगवान नही मिल सकते। वैसे भगवान खुद को साबित करने के लिये भक्तों की तलाश करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि 29 वर्षो की अविरल यात्रा को आज गुरु दक्षिणा के ऋण चुकाने के रुप में एक पड़ाव मिला। श्री मद् भगवत गीता को साक्षात कामधेनु बताते हुये कहा कि कलयुग में केवल भगवान के नाम जप से ही वैतरणी पार हो सकती है। उन्होंने दृष्टांतों के माध्यम से समझाया कि राम न कह पाने पर कोई बात नही केवल रां से ही काम चलाया जा सकता है। कथा के अंत में उन्होंने 5 करोड़ 29 लाख 71 हजार महारुद्रों के निर्माण हो जाने की घोषणा की। इस दौरान कथा सुनने आये मप्र के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजय वर्गीय ने 'छोटो से मेरो मदन गोपाल' भजन सुनाकर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। कथा के समापन पर बाहर से आये भक्तों व इस तीर्थ क्षेत्र के संतों ने आचार्य श्री को महारुद्रों को पूरा करने के उनके संकल्प पर बधाई देते हुये साधुवाद भी दिया। इस दौरान कथा सुनने के लिये कर्नाटक वाली माता जी, आचार्य नवलेश जी दीक्षित के साथ ही वेद विद्यालय के विद्वान आचार्यो के साथ ही डीआरआई के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक समेत, मायानगरी के आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, केवल कृष्ण, सुनील सोहाने, संतोष उपाध्याय, संजय अग्रवाल मौजूद रहे।
चित्रकूट। नर कर्म प्रधान है, नारी धर्म प्रधान है और नारायण मर्म प्रधान हैं। यह भाव ही अनुभूति का विषय है। यह बातें आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री ने रैन बसेरा परिसर में संकल्प पूर्ति महा महोत्सव में रविवार को देश विदेश से आये अपने तमाम शिष्यों को संबोधित करते करते हुये कहीं।
उन्होंने कहा कि विषयों से निजात पान का उपाय संतों की शरण में मिलता है। विषयों से वीतरागी संत अपने शिष्य को खूबसूरती से बाहर निकालकर उसे परमात्मा का साक्षात्कार करा देते हैं। फिर चित्रकूट जैसी वसुन्धरा जहां पर आदि काल से ही संतों का डेरा है वास्तव में महान हैं। यहां तो प्रभु के चरण सर्वत्र पड़े और उनकी चरण धूलि आज भी वातावरण में धूल बनकर टहल रही है। यहां आने वाला हर एक प्राणी कृतार्थ हो गया। आचार्य श्री ने संतों को साक्षात ईश्वर की उपाधि देते हुये कहा कि इनके दर्शनों से ही जीवन तर जाता है। बताया कि शायद वे विश्व के इकलौते ऐसे शिष्य होंगे जिसकी गुरु दीक्षा कारागार में हुई थी। उन दिनों में काशी में मंदिरों में हरिजनों के प्रवेश करने पर आंदोलन हुआ था जिसमें वे चार दिनों के लिये जेल गये थे। उन्होंने सपाट शब्दों में कहा कि परमात्मा अनुभूति का विषय है और अपने आपको जाने बिना परमात्मा का मर्म नही जाना जा सकता। व्यक्ति में बिना पात्रता आये भगवान नही मिल सकते। वैसे भगवान खुद को साबित करने के लिये भक्तों की तलाश करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि 29 वर्षो की अविरल यात्रा को आज गुरु दक्षिणा के ऋण चुकाने के रुप में एक पड़ाव मिला। श्री मद् भगवत गीता को साक्षात कामधेनु बताते हुये कहा कि कलयुग में केवल भगवान के नाम जप से ही वैतरणी पार हो सकती है। उन्होंने दृष्टांतों के माध्यम से समझाया कि राम न कह पाने पर कोई बात नही केवल रां से ही काम चलाया जा सकता है। कथा के अंत में उन्होंने 5 करोड़ 29 लाख 71 हजार महारुद्रों के निर्माण हो जाने की घोषणा की। इस दौरान कथा सुनने आये मप्र के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजय वर्गीय ने 'छोटो से मेरो मदन गोपाल' भजन सुनाकर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। कथा के समापन पर बाहर से आये भक्तों व इस तीर्थ क्षेत्र के संतों ने आचार्य श्री को महारुद्रों को पूरा करने के उनके संकल्प पर बधाई देते हुये साधुवाद भी दिया। इस दौरान कथा सुनने के लिये कर्नाटक वाली माता जी, आचार्य नवलेश जी दीक्षित के साथ ही वेद विद्यालय के विद्वान आचार्यो के साथ ही डीआरआई के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक समेत, मायानगरी के आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, केवल कृष्ण, सुनील सोहाने, संतोष उपाध्याय, संजय अग्रवाल मौजूद रहे।
नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की
Jul 12, 10:35 pm
चित्रकूट। इधर छोटी-छोटी गईया छोटे-छोटे ग्वाल हुआ तो उधर एक छोटे से कृष्ण कन्हैया यशोदा मां की गोद में स्टेज पर आ गये और जाकर सीधे आचार्य पं.देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की गोद में सीधे विराज गये। इसके बाद तो घंटा व घडि़यालों के साथ ही 'नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की'। भक्त भी संगीतकार व गायक सुजीत चौबे के भजनों पर अपने आपको रोक न पाये। सभा पंडाल में मौजूद बच्चे बूढ़े सभी श्री कृष्ण के जन्म की खुशी मे नाचने लगे।
उल्लास व प्रसन्नता हर चेहरे पर साफ दिख रही थी। लोग एक दूसरे को बधाइयां देते घूम रहे थे। इस दौरान काफी भक्तों ने मिठाइयां बांटी तो वेद पाठी ब्राह्मणों ने योगेश्वर श्री कृष्ण का स्वागत वेद मंत्रों से किया। फिल्मी दुनिया के मौजूद तमाम सितारे भी अपने आपको इस दृश्य से दूर न रख सके। आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, अरुंधती, केवल कृष्ण ने आचार्य श्री को चरण छूकर बधाई दी। इस दौरान आचार्य श्री ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष झांकी बनाने वाले सेट डिजायनर मार्तन्ड व रश्मि को भी बधाई दी।
चित्रकूट। इधर छोटी-छोटी गईया छोटे-छोटे ग्वाल हुआ तो उधर एक छोटे से कृष्ण कन्हैया यशोदा मां की गोद में स्टेज पर आ गये और जाकर सीधे आचार्य पं.देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' की गोद में सीधे विराज गये। इसके बाद तो घंटा व घडि़यालों के साथ ही 'नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की'। भक्त भी संगीतकार व गायक सुजीत चौबे के भजनों पर अपने आपको रोक न पाये। सभा पंडाल में मौजूद बच्चे बूढ़े सभी श्री कृष्ण के जन्म की खुशी मे नाचने लगे।
उल्लास व प्रसन्नता हर चेहरे पर साफ दिख रही थी। लोग एक दूसरे को बधाइयां देते घूम रहे थे। इस दौरान काफी भक्तों ने मिठाइयां बांटी तो वेद पाठी ब्राह्मणों ने योगेश्वर श्री कृष्ण का स्वागत वेद मंत्रों से किया। फिल्मी दुनिया के मौजूद तमाम सितारे भी अपने आपको इस दृश्य से दूर न रख सके। आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, अरुंधती, केवल कृष्ण ने आचार्य श्री को चरण छूकर बधाई दी। इस दौरान आचार्य श्री ने श्री कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष झांकी बनाने वाले सेट डिजायनर मार्तन्ड व रश्मि को भी बधाई दी।
अभी थमा नही है महारुद्रों के निर्माण का सिलसिला
Jul 12, 10:35 pm
चित्रकूट। भले ही महारुद्रों की संकल्प महा पूर्ति पूरी हो गयी हो पर अभी भी रुद्रों को बनाने में आचार्य श्री के भक्तों के साथ ही स्थानीय लोग लगे रहे। रविवार को स्कूलों व आफिसों के बंद होने का फायदा काफी लोगों ने उठाया। सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये।
रविवार की सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल भी माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। बाद में आचार्य पूरन महाराज ने महारुद्राभिषेक का कार्यक्रम सम्पन्न कराया। आज जिलाधिकारी फिर अपने परिवार के साथ पहुंचे और महारुद्रों का अभिषेक करने के साथ ही लालापुर से होकर गुजरने वाली वाल्मीकि नदी में फिल्म सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह के साथ ही विसर्जन में भी भाग लिया।
चित्रकूट। भले ही महारुद्रों की संकल्प महा पूर्ति पूरी हो गयी हो पर अभी भी रुद्रों को बनाने में आचार्य श्री के भक्तों के साथ ही स्थानीय लोग लगे रहे। रविवार को स्कूलों व आफिसों के बंद होने का फायदा काफी लोगों ने उठाया। सुबह से लोग रैन बसेरा परिसर के विशाल मैदान में पहुंच गये और काली मिट्टी से लाखों महारुद्रों के निर्माण में जुटे रहे। उधर, श्री राम अर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत की आहुतियां भी लोग यज्ञ शाला में डालते दिखाई दिये।
रविवार की सुबह पौ फटते ही मुख्यालय के साथ ही तीर्थ क्षेत्र के रहने वाले संतों व महंतों के रुख भी महारुद्र पंडाल की तरफ दिखाई दिया। लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा के साथ काली मिट्टी के शिव लिंग बनाने का काम जारी रखा। देश के विभिन्न हिस्सों से आये सेवादार भी महारुद्रों के निर्माण में लगने वाली सामग्री का वितरण जारी रखा, उधर निर्माण के साथ ही भजनों के दौर को आगे बढ़ाने का काम राधे-राधे मंडल व संगीतकार सुजीत चौबे ने किया। बीच-बीच में जयकारों को बोल भी माहौल में उल्लास व उत्साह भरने का काम कर रहे थे। बाद में आचार्य पूरन महाराज ने महारुद्राभिषेक का कार्यक्रम सम्पन्न कराया। आज जिलाधिकारी फिर अपने परिवार के साथ पहुंचे और महारुद्रों का अभिषेक करने के साथ ही लालापुर से होकर गुजरने वाली वाल्मीकि नदी में फिल्म सितारे आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह के साथ ही विसर्जन में भी भाग लिया।
शिव पूजन की प्रथम स्थली चित्रकूट : रामभद्राचार्य
Jul 13, 10:24 pm
चित्रकूट। शिवलिंग की परंपरा का प्रथम पूजन स्थल चित्रकूट है। मंदाकिनी के किनारे भगवान मत्स्यगयेन्द्र नाथ हैं। भोलेनाथ ने यहीं पर अंधकासुर का वध कर उसकी खाल की छाला पहनी थी। यह बाते सोमवार को संकल्प पूर्ति महोत्सव के पंडाल पर पहुंचे जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी महाराज ने कहीं।
संकल्प पूर्ति महा महोत्सव के छठे दिन रैनबसेरा मैदान में पहुंचे जगद्गुरु ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भले ही देश में हर जगह पीठों की स्थापना प्राचीन हो पर पीठों की स्थापना की परंपरा तो चित्रकूट से ही प्रारंभ हुई हैं। यहां पर भगवान राम ने भरत को अपनी खड़ाऊं देकर इस परंपरा की शुरुआत की थी। जगद्गुरु ने कहा कि आज के दौर में हर व्यक्ति तनाव व भाग दौड़ भरी जिंदगी का आदी होने के चलते थका हुआ है। ऐसे में थका का उल्टा कथा होता है, वह कथा के माध्यम से तरोताजा होकर फिर से अपने काम में लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की समस्याओं का निदान सिर्फ राम चरित मानस में है। जब तक रामचरित मानस इस देश का राष्ट्रीय ग्रंथ नहीं होगा तब तक देश का कल्याण व समस्याओं से निदान नही हो सकता। श्री राम के साहित्य को उन्होंने आज के परिवेश में परिभाषित करते हुये कहा कि रावण से बड़ा आतंकवादी कोई हुआ ही नही है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा महादेव के पार्थिव पूजन को रामचरित मानस के अयोध्या कांड की चौपाई 'तब मज्जन कर रघुकुल नाथा, पूर्जि पार्थिव नायंऊ माथा' का उदाहरण देकर सेतु बंधु रामेश्वर में भी राम द्वारा बालू के शिव लिंग बनाकर उनका पूजन करने का उदाहरण दिया। इस दौरान आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी ने जगद्गुरु का स्वागत मंच पर किया। उसके पहले फिल्म स्टार आशुतोष राणा व राज पाल यादव, पद्म सिंह, संगीतकार सुजीत चौबे, केवल कृष्ण आदि ने जगद्गुरु की अगवानी की। इस दौरान जगद्गुरु की निजी सचिव डा. गीता मिश्रा 'बुआ जी', कर्नाटक वाली माता जी मौजूद रहीं।
चित्रकूट। शिवलिंग की परंपरा का प्रथम पूजन स्थल चित्रकूट है। मंदाकिनी के किनारे भगवान मत्स्यगयेन्द्र नाथ हैं। भोलेनाथ ने यहीं पर अंधकासुर का वध कर उसकी खाल की छाला पहनी थी। यह बाते सोमवार को संकल्प पूर्ति महोत्सव के पंडाल पर पहुंचे जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी महाराज ने कहीं।
संकल्प पूर्ति महा महोत्सव के छठे दिन रैनबसेरा मैदान में पहुंचे जगद्गुरु ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भले ही देश में हर जगह पीठों की स्थापना प्राचीन हो पर पीठों की स्थापना की परंपरा तो चित्रकूट से ही प्रारंभ हुई हैं। यहां पर भगवान राम ने भरत को अपनी खड़ाऊं देकर इस परंपरा की शुरुआत की थी। जगद्गुरु ने कहा कि आज के दौर में हर व्यक्ति तनाव व भाग दौड़ भरी जिंदगी का आदी होने के चलते थका हुआ है। ऐसे में थका का उल्टा कथा होता है, वह कथा के माध्यम से तरोताजा होकर फिर से अपने काम में लग सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की समस्याओं का निदान सिर्फ राम चरित मानस में है। जब तक रामचरित मानस इस देश का राष्ट्रीय ग्रंथ नहीं होगा तब तक देश का कल्याण व समस्याओं से निदान नही हो सकता। श्री राम के साहित्य को उन्होंने आज के परिवेश में परिभाषित करते हुये कहा कि रावण से बड़ा आतंकवादी कोई हुआ ही नही है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा महादेव के पार्थिव पूजन को रामचरित मानस के अयोध्या कांड की चौपाई 'तब मज्जन कर रघुकुल नाथा, पूर्जि पार्थिव नायंऊ माथा' का उदाहरण देकर सेतु बंधु रामेश्वर में भी राम द्वारा बालू के शिव लिंग बनाकर उनका पूजन करने का उदाहरण दिया। इस दौरान आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी ने जगद्गुरु का स्वागत मंच पर किया। उसके पहले फिल्म स्टार आशुतोष राणा व राज पाल यादव, पद्म सिंह, संगीतकार सुजीत चौबे, केवल कृष्ण आदि ने जगद्गुरु की अगवानी की। इस दौरान जगद्गुरु की निजी सचिव डा. गीता मिश्रा 'बुआ जी', कर्नाटक वाली माता जी मौजूद रहीं।
हरहर-बमबम से गूंजी धर्मनगरी
Jul 13, 10:24 pm
चित्रकूट। रिमझिम बारिश के बीच सावन के पहले सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मत्स्यगयेन्द्र नाथ मंदिर के साथ ही जनपद के अन्य शिवालयों में भक्त दिनभर भोले बाबा का पूजन करते रहे।
तीर्थ नगरी में सोमवार को भगवान शंकर के भक्तों का सैलाब उमड़ सा दिखाई दे रहा था। सावन के पहले सोमवार पर चित्रकूट के महाराजाधिराजस्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के दर्शनों के लिये आये सैलाब के सामने मंदिर का प्रांगण छोटा पड़ गया। हर कहीं हरहर बमबम और ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ भक्त हाथों में मंदाकिनी का जल, दूध, बेल, धतेरा, बेल पत्र, चंदन, भांग, धतूरा, के साथ पुष्पों को लिए कतारों में खड़े थे। शिव तांडव स्त्रोत व शिव महिमा के कैसेट समूचे क्षेत्र में गुंजायमान हो रहे थे। बाहर से आये कांवरियों और उनकी रक्तिम आभा युक्त पोशाकों से पूरे तीर्थक्षेत्र में रौनक बढ़ गयी। तमाम श्रद्धालु श्री राम जी के राज्याभिषेक के लिए लाये जाने वाले समस्त नदियों व तीर्थो के जल को अपने में समाहित रखने वाले भरतकूप के कुएं का भी जल लाये थे। तमाम भक्त राजापुर व मऊ से पवित्र यमुना का जल लेकर अभिषेक करने आये थे। स्थानीय दुकानदार भी यहां पर शिव महिमा से सम्बंधित कैसेटों के गीतों को बजाते दिखाई दिये।
चित्रकूट। रिमझिम बारिश के बीच सावन के पहले सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मत्स्यगयेन्द्र नाथ मंदिर के साथ ही जनपद के अन्य शिवालयों में भक्त दिनभर भोले बाबा का पूजन करते रहे।
तीर्थ नगरी में सोमवार को भगवान शंकर के भक्तों का सैलाब उमड़ सा दिखाई दे रहा था। सावन के पहले सोमवार पर चित्रकूट के महाराजाधिराजस्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के दर्शनों के लिये आये सैलाब के सामने मंदिर का प्रांगण छोटा पड़ गया। हर कहीं हरहर बमबम और ऊं नम: शिवाय के उद्घोषों के साथ भक्त हाथों में मंदाकिनी का जल, दूध, बेल, धतेरा, बेल पत्र, चंदन, भांग, धतूरा, के साथ पुष्पों को लिए कतारों में खड़े थे। शिव तांडव स्त्रोत व शिव महिमा के कैसेट समूचे क्षेत्र में गुंजायमान हो रहे थे। बाहर से आये कांवरियों और उनकी रक्तिम आभा युक्त पोशाकों से पूरे तीर्थक्षेत्र में रौनक बढ़ गयी। तमाम श्रद्धालु श्री राम जी के राज्याभिषेक के लिए लाये जाने वाले समस्त नदियों व तीर्थो के जल को अपने में समाहित रखने वाले भरतकूप के कुएं का भी जल लाये थे। तमाम भक्त राजापुर व मऊ से पवित्र यमुना का जल लेकर अभिषेक करने आये थे। स्थानीय दुकानदार भी यहां पर शिव महिमा से सम्बंधित कैसेटों के गीतों को बजाते दिखाई दिये।
बाहर से आये शिवभक्तों ने भी बनाये महारुद्र
Jul 13, 10:24 pm
चित्रकूट। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में सोमवार को स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आये शिव भक्त कांवरिये भी निर्माण स्थल पर पहुंच गये। उन्होंने भी श्रद्धा व आस्था के साथ रुद्रों का निर्माण करने के साथ ही पूजन किया।
प्रात:काल से ही स्थानीय व बाहर से आये भक्तों का हुजूम पहले स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ जी के दरबार में हाजिरी लगाने के पश्चात स्वामी कामतानाथ पहुंचा और उसके बाद उनका रुख सीधे रुद्र निर्माण पंडाल की तरफ हो गया। भक्तों ने भी काली मिट्टी से कटी गोलियों की सहायता से महारुद्रों का निर्माण किया। इसी बीच श्री रामअर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत के साथ ही महा मृत्युंजय मंत्र की आहुतियों के दौर भी यज्ञ मंडप में जारी रहे। दोपहर को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के कथा पंडाल पर आने पर उनके प्रवचन सुने। दोपहर बाद बनाये गये शिवलिंगं वाल्मीकी नदी में विसर्जित किया गया। पूजन करने व विसर्जन करने में फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, दीप राज राणा, पद्म सिंह मौजूद रहे।
चित्रकूट। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव में सोमवार को स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आये शिव भक्त कांवरिये भी निर्माण स्थल पर पहुंच गये। उन्होंने भी श्रद्धा व आस्था के साथ रुद्रों का निर्माण करने के साथ ही पूजन किया।
प्रात:काल से ही स्थानीय व बाहर से आये भक्तों का हुजूम पहले स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ जी के दरबार में हाजिरी लगाने के पश्चात स्वामी कामतानाथ पहुंचा और उसके बाद उनका रुख सीधे रुद्र निर्माण पंडाल की तरफ हो गया। भक्तों ने भी काली मिट्टी से कटी गोलियों की सहायता से महारुद्रों का निर्माण किया। इसी बीच श्री रामअर्चा व श्री राम रक्षा स्त्रोत के साथ ही महा मृत्युंजय मंत्र की आहुतियों के दौर भी यज्ञ मंडप में जारी रहे। दोपहर को जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के कथा पंडाल पर आने पर उनके प्रवचन सुने। दोपहर बाद बनाये गये शिवलिंगं वाल्मीकी नदी में विसर्जित किया गया। पूजन करने व विसर्जन करने में फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, दीप राज राणा, पद्म सिंह मौजूद रहे।
चित्रों के इस कूट में सहजता से मिलते भगवान
Jul 13, 10:25 pm
चित्रकूट। भगवान के मिलने के ज्वलंत उदाहरण चित्रकूट की पवित्र धरती पर आज भी मौजूद हैं। जब प्राणी भगवान को चित्त मे धारण कर लेता है तो उसे चित्रों के इस कूट में भगवान सहजता से मिल जाते हैं। संत तुलसी के साथ ही इस धरती के तमाम ऐसे महात्मा हैं जिन्होंने परमात्मा के दर्शन किये हैं। यह बातें आचार्य आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' ने हजारों शिव भक्तों को संबोधित करते हुये कहीं।
उन्होंने चित्रकूट की विशद व्याख्या के दौरान कहा कि लोभ लाभ का परित्याग कर चित्त में भगवान को बैठा लेने पर प्रभु के दर्शन सहजता से होते हैं। भरत जी भी यहां पर गुरु वशिष्ठ इसीलिये अपने साथ लेकर आये थे क्योंकि हर चीज उनके बस में थी। अनोखे मिलन की स्थली के रूप में चित्रकूट को निरुपित करने के साथ ही कहा कि 'हरि व्यापक सवर्ग समाना, प्रेम से प्रकट होहि भगवाना'।
उन्होंने कहा कि परमात्मा को ढ़ूंढने की कला संतों के आर्शीवाद से ही मिल सकती है। वाणी को वीणा बना लेने से जीवन में पवित्रता आ जाती है। संसार में उपलब्धियों का क्रम अपने आप प्रारंभ हो जाता है। संत कृपा दुर्लभ नही है पर संत कृपा के लिये चिंतन का होना अति आवश्यक है। संतों की कृपा कब जीवन में हो जायेगी यह पता भी नहीं चलेगा और जीवन अंधकार से प्रकाश की ओर चल पड़ेगा। मार्गदर्शक के लक्षण बताते हुये कहा कि वह ज्यादा चालाक व व्यवहार कुशल हो तो सहगामी बौरा नहीं सकता। अनुगामी लंगड़ा न हो अर्थात अनुगामी लंगड़ा होगा तो बोझा कौन ढोएगा। कथनी और करनी में एकता होने से मानव समाज दिग्भ्रमित होने से बच सकता है। कथा के अंत में उन्होंने बताया कि अभी तक कुल छह करोड़ बाइस लाख दो सौ नवासी महारुद्रों का निर्माण हो चुका है।
चित्रकूट। भगवान के मिलने के ज्वलंत उदाहरण चित्रकूट की पवित्र धरती पर आज भी मौजूद हैं। जब प्राणी भगवान को चित्त मे धारण कर लेता है तो उसे चित्रों के इस कूट में भगवान सहजता से मिल जाते हैं। संत तुलसी के साथ ही इस धरती के तमाम ऐसे महात्मा हैं जिन्होंने परमात्मा के दर्शन किये हैं। यह बातें आचार्य आचार्य पं. देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' ने हजारों शिव भक्तों को संबोधित करते हुये कहीं।
उन्होंने चित्रकूट की विशद व्याख्या के दौरान कहा कि लोभ लाभ का परित्याग कर चित्त में भगवान को बैठा लेने पर प्रभु के दर्शन सहजता से होते हैं। भरत जी भी यहां पर गुरु वशिष्ठ इसीलिये अपने साथ लेकर आये थे क्योंकि हर चीज उनके बस में थी। अनोखे मिलन की स्थली के रूप में चित्रकूट को निरुपित करने के साथ ही कहा कि 'हरि व्यापक सवर्ग समाना, प्रेम से प्रकट होहि भगवाना'।
उन्होंने कहा कि परमात्मा को ढ़ूंढने की कला संतों के आर्शीवाद से ही मिल सकती है। वाणी को वीणा बना लेने से जीवन में पवित्रता आ जाती है। संसार में उपलब्धियों का क्रम अपने आप प्रारंभ हो जाता है। संत कृपा दुर्लभ नही है पर संत कृपा के लिये चिंतन का होना अति आवश्यक है। संतों की कृपा कब जीवन में हो जायेगी यह पता भी नहीं चलेगा और जीवन अंधकार से प्रकाश की ओर चल पड़ेगा। मार्गदर्शक के लक्षण बताते हुये कहा कि वह ज्यादा चालाक व व्यवहार कुशल हो तो सहगामी बौरा नहीं सकता। अनुगामी लंगड़ा न हो अर्थात अनुगामी लंगड़ा होगा तो बोझा कौन ढोएगा। कथनी और करनी में एकता होने से मानव समाज दिग्भ्रमित होने से बच सकता है। कथा के अंत में उन्होंने बताया कि अभी तक कुल छह करोड़ बाइस लाख दो सौ नवासी महारुद्रों का निर्माण हो चुका है।
शिवभक्ति में डूब गयी राम की नगरी
Jul 14, 10:41 pm
चित्रकूट। सावन के महीने में हर तरफ शिव भक्ति की गूंज सुनायी दे रही है। संकल्प की पूर्ति होने के बाद भी रैन बसेरा मैदान के पंडाल में शिव के भक्त काली मिट्टी की गोलियों महारुद्रों के निर्माण में जुटे हुए हैं। यहां पर रुद्र बनाने के काम में जहां फिल्मी दुनिया के तमाम कलाकार हैं वहीं आम लोगों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी इस काम को कर पुण्य कमा रहे हैं।
तमाम धारावाहिकों में अपनी चमक बिखेरने वाली अरुंधती कहती हैं कि वह हमारा पेशा है, पर यह हमारी विरासत का अमूल्य हिस्सा है। इसको करके हमें सुकून मिलता है और शिव की भक्ति से ही हमारा सब कुछ ठीक रहेगा। उधर, पंडाल पर आम आदमी के रुप में रुद्रों के निर्माण में जुटे अपर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर कहते हैं कि पुलिस का काम अलग है, पर भगवान की भक्ति तो यहां पर आने के पहले ही उनके खून में रची बसी है। सावन के महीने में चित्रकूट की धरती पर बैठकर महारुद्रों के निर्माण के सुख का वर्णन किया ही नही जा सकता। इसी दौरान सेवादारों ने जहां पहले मिट्टी की गोलियों का वितरण किया वहीं काफी सेवादार महारुद्रों के निर्माण में लगे लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। इसके बाद इन्हीं सेवादारों ने पूजन सामग्री वितरण काम भी किया। इस दौरान राधे-राधे मंडल सागर और फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के भजनों पर लोग थिरकते रहे। महिलाओं के हाल तो यह थे कि उन्हें 'इक पल चैन न आये कान्हा तेरे बिना' पर बैठने के लिए भी कहना पड़ा। उधर, महारुद्रों के निर्माण के बाद रुद्राभिषेक का कार्यक्रम भी चला। आचार्य पूरन महाराज के मंत्रों पर लोग मूर्तियों को पूजते रहे। फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीपराज राणा समेत तमाम और लोगों के साथ ही लगभग पचास हजार लोग मौजूद रहे।
चित्रकूट। सावन के महीने में हर तरफ शिव भक्ति की गूंज सुनायी दे रही है। संकल्प की पूर्ति होने के बाद भी रैन बसेरा मैदान के पंडाल में शिव के भक्त काली मिट्टी की गोलियों महारुद्रों के निर्माण में जुटे हुए हैं। यहां पर रुद्र बनाने के काम में जहां फिल्मी दुनिया के तमाम कलाकार हैं वहीं आम लोगों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी इस काम को कर पुण्य कमा रहे हैं।
तमाम धारावाहिकों में अपनी चमक बिखेरने वाली अरुंधती कहती हैं कि वह हमारा पेशा है, पर यह हमारी विरासत का अमूल्य हिस्सा है। इसको करके हमें सुकून मिलता है और शिव की भक्ति से ही हमारा सब कुछ ठीक रहेगा। उधर, पंडाल पर आम आदमी के रुप में रुद्रों के निर्माण में जुटे अपर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर कहते हैं कि पुलिस का काम अलग है, पर भगवान की भक्ति तो यहां पर आने के पहले ही उनके खून में रची बसी है। सावन के महीने में चित्रकूट की धरती पर बैठकर महारुद्रों के निर्माण के सुख का वर्णन किया ही नही जा सकता। इसी दौरान सेवादारों ने जहां पहले मिट्टी की गोलियों का वितरण किया वहीं काफी सेवादार महारुद्रों के निर्माण में लगे लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। इसके बाद इन्हीं सेवादारों ने पूजन सामग्री वितरण काम भी किया। इस दौरान राधे-राधे मंडल सागर और फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के भजनों पर लोग थिरकते रहे। महिलाओं के हाल तो यह थे कि उन्हें 'इक पल चैन न आये कान्हा तेरे बिना' पर बैठने के लिए भी कहना पड़ा। उधर, महारुद्रों के निर्माण के बाद रुद्राभिषेक का कार्यक्रम भी चला। आचार्य पूरन महाराज के मंत्रों पर लोग मूर्तियों को पूजते रहे। फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीपराज राणा समेत तमाम और लोगों के साथ ही लगभग पचास हजार लोग मौजूद रहे।
जेबकतरे साफ कर रहे भक्तों की जेब
Jul 14, 10:41 pm
चित्रकूट। परिक्षेत्र के आसपास के गांवों के साथ ही रामायण मेला परिसर के पास के तमाम मुहल्लों की मानो लाटरी सी खुल गई। सावन के पहले ही दिन बिन मांगे रोजगार जो मिल गया। इस कारण तमाम लोग नंगे पैर और खाली जेब घर जा रहे हैं। महारुद्र पंडाल के साथ ही रामायण मेला परिसर पर आने वाले लोग जेबकतरों का शिकार हो रहे हैं तो महारुद्रों का निर्माण करने वालों के जूते चप्पल भी गायब हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक संकल्प पूर्ति महामहोत्सव के प्रारंभ होने के पहले ही दिनों से भगवा वेश में रंगे तमाम भिखारियों की भरमार सीतापुर में हो गई थी। पहले दिन से यहां पर लोगों की जेब कटने का सिलसिला भी तेजी से चल रहा है। मुम्बई से आये छगन भाई व रोमेश पवार ने बताया कि अभी तक उनकी जेब चार बार कट चुकी है। पुलिस कर्मियों से बात करने पर टका सा जवाब देते हैं कि अपनी सुरक्षा खुद क्यों नही करते। हमारा काम वीआईपी की देखरेख और मेला को नियंत्रित रखने की है। झांसी से आये तेज प्रकाश सिंह बताते हैं कि चप्पलें तो तीन दिनों में तीन बार उनकी गायब हुई। हर बार नंगे पैर जाकर नई चप्पल लानी पड़ी।
चित्रकूट। परिक्षेत्र के आसपास के गांवों के साथ ही रामायण मेला परिसर के पास के तमाम मुहल्लों की मानो लाटरी सी खुल गई। सावन के पहले ही दिन बिन मांगे रोजगार जो मिल गया। इस कारण तमाम लोग नंगे पैर और खाली जेब घर जा रहे हैं। महारुद्र पंडाल के साथ ही रामायण मेला परिसर पर आने वाले लोग जेबकतरों का शिकार हो रहे हैं तो महारुद्रों का निर्माण करने वालों के जूते चप्पल भी गायब हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक संकल्प पूर्ति महामहोत्सव के प्रारंभ होने के पहले ही दिनों से भगवा वेश में रंगे तमाम भिखारियों की भरमार सीतापुर में हो गई थी। पहले दिन से यहां पर लोगों की जेब कटने का सिलसिला भी तेजी से चल रहा है। मुम्बई से आये छगन भाई व रोमेश पवार ने बताया कि अभी तक उनकी जेब चार बार कट चुकी है। पुलिस कर्मियों से बात करने पर टका सा जवाब देते हैं कि अपनी सुरक्षा खुद क्यों नही करते। हमारा काम वीआईपी की देखरेख और मेला को नियंत्रित रखने की है। झांसी से आये तेज प्रकाश सिंह बताते हैं कि चप्पलें तो तीन दिनों में तीन बार उनकी गायब हुई। हर बार नंगे पैर जाकर नई चप्पल लानी पड़ी।
दोस्ती करने पर अच्छाई में बदल जाती बुराई
Jul 14, 10:42 pm
चित्रकूट। जीवन यात्रा में परमात्मा का नाम रहेगा तो यात्रा अपने आप ही मंगलमय होती जायेगी। बुराई से दोस्ती करने पर बुराई अच्छाई में बदल जायेगी। यह बात देव प्रभाकर शास्त्री ने हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा धर्म अपनी कसौटी पर कसा जाता है, पर मर्म की कोई कसौटी नहीं होती। परमात्मा का जीवन ही परमार्थ के लिए है। संसार में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं एक योगी व दूसरा भोगी। योगी दिव्य चक्षुओं से भगवान का दर्शन कर लेते हैं, यह ऐश्वर्य लीला है। भोगियों को चर्म चक्षुओं से निराकार भगवान के दर्शन नहीं होते। इसलिये प्रभु को निराकार से साकार स्वरूप में आना पड़ा, यह प्रभु की माधुर्य लीला है। जीवन में दो बिंदु होते हैं एक साधक व बाधक। बुराई से दोस्ती करने पर ही भलाई के दर्शन होते हैं। अपने जीवन को उन्मुख बनाने के लिए परमात्मा के संसार की प्रत्येक वस्तु उपयोगी है, लेकिन उसमें चिंतन होना चाहिये। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। स्थानीय कलाकार विनय साहू ने चावल के दानों पर शिवलिंग व दाल के दानों पर दद्दा जी के चित्र के साथ चित्रकूट की प्राकृतिक सुषमा को दर्शाता तैल चित्र लेकर पहुंचा तो सभी लोग वाह-वाह कर उठे। विनय फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का भी चित्र दाल के दाने पर उकेर कर वहां पहुंचा था। दद्दा जी ने इस कलाकार को आशीर्वाद दिया।
चित्रकूट। जीवन यात्रा में परमात्मा का नाम रहेगा तो यात्रा अपने आप ही मंगलमय होती जायेगी। बुराई से दोस्ती करने पर बुराई अच्छाई में बदल जायेगी। यह बात देव प्रभाकर शास्त्री ने हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा धर्म अपनी कसौटी पर कसा जाता है, पर मर्म की कोई कसौटी नहीं होती। परमात्मा का जीवन ही परमार्थ के लिए है। संसार में दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं एक योगी व दूसरा भोगी। योगी दिव्य चक्षुओं से भगवान का दर्शन कर लेते हैं, यह ऐश्वर्य लीला है। भोगियों को चर्म चक्षुओं से निराकार भगवान के दर्शन नहीं होते। इसलिये प्रभु को निराकार से साकार स्वरूप में आना पड़ा, यह प्रभु की माधुर्य लीला है। जीवन में दो बिंदु होते हैं एक साधक व बाधक। बुराई से दोस्ती करने पर ही भलाई के दर्शन होते हैं। अपने जीवन को उन्मुख बनाने के लिए परमात्मा के संसार की प्रत्येक वस्तु उपयोगी है, लेकिन उसमें चिंतन होना चाहिये। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। स्थानीय कलाकार विनय साहू ने चावल के दानों पर शिवलिंग व दाल के दानों पर दद्दा जी के चित्र के साथ चित्रकूट की प्राकृतिक सुषमा को दर्शाता तैल चित्र लेकर पहुंचा तो सभी लोग वाह-वाह कर उठे। विनय फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा का भी चित्र दाल के दाने पर उकेर कर वहां पहुंचा था। दद्दा जी ने इस कलाकार को आशीर्वाद दिया।
गुरुवार, 9 जुलाई 2009
पूरी तरह भक्ति में डूबे रहे फिल्म स्टार
Jul 08, 11:01 pm
चित्रकूट। फिल्मों में शानदार अभिनय कर लोगों से प्यार और दुलार पाने वाले फिल्मी सितारे चित्रकूट की पावन धरती पर पूरी तरह जमीं पर थे। उन्हें न तो यहां स्टोरी की चिंता और फिल्म के रिलीज होने पर हिट और फ्लाप होने का डर। यहां तक कि लाइट, कैमरा, डायलाग और रिहर्सल की जगह उनके मुंह पर अगर कुछ था तो वह थी आध्यात्मिक चर्चा।
फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पदम सिंह, दीपराज राणा, अनुपम कौशिक, संजीव वत्स, अरुंधती, मनीषा ओझा, पूर्वी भट्टं, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, चंद्र पाल यादव आदि ऐसे नाम हैं जिन्हें फिल्मी दुनिया में पहचान प्राप्त हो चुकी है। कैमरा और गासिप्स के साथ अंतरंग संबंध रखने वाले अधिकतर कलाकारों का हाल यह है कि उनमें इस कदर भक्ति की भावना समाहित है कि वे सिर्फ बाबा भोले की भक्ति व भगवान राम की कर्मस्थली व उनके गुरु 'दद्दा जी' के अलावा दूसरी बात करने पर वे बात का रुख इन्हीं बिंदुओं पर ले आते हैं। राजपाल यादव व पदम सिंह तो साफ तौर पर कहते हैं कि भइया भले ही हम स्टार बन गये हों पर हैं तो आपके ही बीच के। जो भावना आपके अंदर अपने धर्म के प्रति है वही हमारे भीतर भी है। दद्दा जी का आदेश हमारे लिए परम पिता का आदेश है और अब आप खुद ही बतायें कि क्या परम पिता के आदेश का पालन न करना किसी की भी हिम्मत है। आशुतोष राणा ने कहा कि हमने भगवान को तो नही देखा पर दद्दा से गुरु रूप में दीक्षा लेकर उन्हें भगवान ही मानते हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि अभी तक के हुये 44 पार्थिव शिव लिंग निर्माणों में मेरी सहभागिता रही है। इसलिये मैं अपने आपको काफी सौभाग्यशाली मानता हूं। उधर, बुधवार को सुबह से ही ये सभी फिल्मी सितारे पार्थिव शिव लिंग निर्माण में जुटे रहे। उस समय उनके मुंह से सिर्फ ओम नम: शिवाय का जाप ही निकल रहा था। यहां तक की आशुतोष राणा समेत लगभग सभी फिल्मी सितारों ने चित्रकूट की उमस भरी गर्मी में लगभग तीस से पैंतीस किलो की परात में बनाये गये शिवलिंगों को शिव धाम में भी रखा।
चित्रकूट। फिल्मों में शानदार अभिनय कर लोगों से प्यार और दुलार पाने वाले फिल्मी सितारे चित्रकूट की पावन धरती पर पूरी तरह जमीं पर थे। उन्हें न तो यहां स्टोरी की चिंता और फिल्म के रिलीज होने पर हिट और फ्लाप होने का डर। यहां तक कि लाइट, कैमरा, डायलाग और रिहर्सल की जगह उनके मुंह पर अगर कुछ था तो वह थी आध्यात्मिक चर्चा।
फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, राज पाल यादव, पदम सिंह, दीपराज राणा, अनुपम कौशिक, संजीव वत्स, अरुंधती, मनीषा ओझा, पूर्वी भट्टं, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, चंद्र पाल यादव आदि ऐसे नाम हैं जिन्हें फिल्मी दुनिया में पहचान प्राप्त हो चुकी है। कैमरा और गासिप्स के साथ अंतरंग संबंध रखने वाले अधिकतर कलाकारों का हाल यह है कि उनमें इस कदर भक्ति की भावना समाहित है कि वे सिर्फ बाबा भोले की भक्ति व भगवान राम की कर्मस्थली व उनके गुरु 'दद्दा जी' के अलावा दूसरी बात करने पर वे बात का रुख इन्हीं बिंदुओं पर ले आते हैं। राजपाल यादव व पदम सिंह तो साफ तौर पर कहते हैं कि भइया भले ही हम स्टार बन गये हों पर हैं तो आपके ही बीच के। जो भावना आपके अंदर अपने धर्म के प्रति है वही हमारे भीतर भी है। दद्दा जी का आदेश हमारे लिए परम पिता का आदेश है और अब आप खुद ही बतायें कि क्या परम पिता के आदेश का पालन न करना किसी की भी हिम्मत है। आशुतोष राणा ने कहा कि हमने भगवान को तो नही देखा पर दद्दा से गुरु रूप में दीक्षा लेकर उन्हें भगवान ही मानते हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि अभी तक के हुये 44 पार्थिव शिव लिंग निर्माणों में मेरी सहभागिता रही है। इसलिये मैं अपने आपको काफी सौभाग्यशाली मानता हूं। उधर, बुधवार को सुबह से ही ये सभी फिल्मी सितारे पार्थिव शिव लिंग निर्माण में जुटे रहे। उस समय उनके मुंह से सिर्फ ओम नम: शिवाय का जाप ही निकल रहा था। यहां तक की आशुतोष राणा समेत लगभग सभी फिल्मी सितारों ने चित्रकूट की उमस भरी गर्मी में लगभग तीस से पैंतीस किलो की परात में बनाये गये शिवलिंगों को शिव धाम में भी रखा।
महारुद्रों के निर्माण के बाद ही खाया अन्न
Jul 08, 11:01 pm
चित्रकूट। 'राम काज कीन्हें बिना मोहि कहां विश्राम' भले ही यह चौपाई रामचरित मानस में हनुमान जी के लिए लिखी गयी हो पर धर्म नगरी में इस चौपाई को चरितार्थ करने में देश विदेश से आये भक्तों ने पूरा जोर लगा दिया। दिन की शुरुआत महारुद्रों के निर्माण से हुई और दोपहर ढलते-ढलते एक करोड़ में शिवलिंग बन गये। वैसे इस काम को अंजाम देने की पीछे की भावना भी एक ही थी कि वे न तो नाश्ता करेंगे और न ही भोजन।
कटनी शिष्य मंडल के मोहन लाल केशरवानी हों, कानपुर के रिटायर्ड फौजी एन बी सिंह चौहान या फिर सागर के एडवोकेट राम सेवक हों सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि वे दद्दा जी का संकल्प पूरा करने आये हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन उनकी बतायी हुई महारुद्रों के निर्माण की संख्या से ज्यादा मात्रा में वे रुद्रों का निर्माण करने में सहयोग करेंगे। कहा कि सभी भक्तों ने विचार कर ही यह निर्णय लिया है कि वे यहां पर बड़े भाग्य से आये हैं और महारुद्रों के निर्माण व पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करेंगे। लगभग पचास से साठ हजार क्षमता का भोजनालय सुबह से ही सूना पड़ा रहा और शाम तीन बजे के बाद ही लोग पूजन के बाद वहां पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही विसर्जन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गयी।
चित्रकूट। 'राम काज कीन्हें बिना मोहि कहां विश्राम' भले ही यह चौपाई रामचरित मानस में हनुमान जी के लिए लिखी गयी हो पर धर्म नगरी में इस चौपाई को चरितार्थ करने में देश विदेश से आये भक्तों ने पूरा जोर लगा दिया। दिन की शुरुआत महारुद्रों के निर्माण से हुई और दोपहर ढलते-ढलते एक करोड़ में शिवलिंग बन गये। वैसे इस काम को अंजाम देने की पीछे की भावना भी एक ही थी कि वे न तो नाश्ता करेंगे और न ही भोजन।
कटनी शिष्य मंडल के मोहन लाल केशरवानी हों, कानपुर के रिटायर्ड फौजी एन बी सिंह चौहान या फिर सागर के एडवोकेट राम सेवक हों सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि वे दद्दा जी का संकल्प पूरा करने आये हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन उनकी बतायी हुई महारुद्रों के निर्माण की संख्या से ज्यादा मात्रा में वे रुद्रों का निर्माण करने में सहयोग करेंगे। कहा कि सभी भक्तों ने विचार कर ही यह निर्णय लिया है कि वे यहां पर बड़े भाग्य से आये हैं और महारुद्रों के निर्माण व पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करेंगे। लगभग पचास से साठ हजार क्षमता का भोजनालय सुबह से ही सूना पड़ा रहा और शाम तीन बजे के बाद ही लोग पूजन के बाद वहां पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही विसर्जन की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गयी।
तो पहले ही दिन बन गये एक करोड़ रुद्र
Jul 08, 11:01 pm
चित्रकूट। सावन के पहले ही दिन महाराजाधिराज स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के आर्शीवाद से अभिसिंचित इस तीर्थ स्थली पर स्वामी करिपात्री जी महाराज के आदेश से गृहस्थ संत आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्यों ने उनके सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण पूजन के पहले ही दिन लगभग एक करोड़ शिव लिंगों का निर्माण कर उनका विधिवत रुद्राभिषेक किया और देर शाम उन्हें वाल्मीकि नदी में विसर्जित कर दिया गया।
पार्थिव पूजन के लिये तैयारियां तो मंगलवार की देर शाम से ही शुरु हो गयी। रैपुरा के पास से लाई गई काली मिट्टी को गीला कर उसके लोदे बनाने के बाद से दद्दा शिष्य मंडल के लोग उन्हें एक पार्थिव लिंग के एवज में एक लोई में परिवर्तित कर चुके थे।
बुधवार को पौ फटते ही देश भर आये दद्दा जी के शिष्यों ने लिंगों के निर्माण के लिये कमर कस ली थी। रैन बसेरा परिसर के विशाल पंडाल में जगह-जगह पर रखी परातें और उनमें बने शिव लिंग भक्तों को उनके निर्माण का आमंत्रण था। पास में ही दद्दा के शिष्य मिट्टी की कटी हुई लोई, चावल, पुष्प, बेलपत्र भी वितरित करते जा रहे थे। देखते ही देखते भक्तों के उमड़े सैलाब ने दोपहर दो बजे के बाद तक महारुद्रों का निर्माण कर कोपरों पर
शिव धाम में पहुंचा दिये। दोपहर दो बजे के बाद सभी पार्थिव शिव लिंगों का पूजन पूरे विधि विधान के साथ वेद पाठी ब्राह्मणों ने सम्पन्न कराया। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी ' ने दोपहर के समय खुद ही विशाल पंडाल पर पहुंच कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि रुद्रों का निर्माण कर रहे हर भक्त के पास पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने भक्तों को रुद्र बनाते समय भगवत स्मरण करने का निर्देश देने के साथ ही उनकी कुशल क्षेम भी पूंछी। इस दौरान स्टेज से मुम्बई से आये फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के दल ने भक्ति रस की गंगा उडे़लनी जारी की हुई थी। भक्तों के मुख से ऊं नम: शिवाय का जाप भी निरंतर चल रहा था। दोपहर के बाद सभी रुद्रों को लादकर लालापुर की वाल्मीकि नदी ले जाया गया जहां पर फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीप राज राणा, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, संतोष उपाध्याय, पीएन सिंह, संजय अग्रवाल व देश भर के आये दद्दा शिष्य मंडल के प्रमुखों ने उनका विसर्जन किया। उधर मंदाकिनी के राम घाट पर मंदाकिनी बचाओ संघर्ष समिति के कमलेश दीक्षित के नेतृत्व में भी प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया।
चित्रकूट। सावन के पहले ही दिन महाराजाधिराज स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के आर्शीवाद से अभिसिंचित इस तीर्थ स्थली पर स्वामी करिपात्री जी महाराज के आदेश से गृहस्थ संत आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्यों ने उनके सवा पांच करोड़ पार्थिव शिव लिंग निर्माण पूजन के पहले ही दिन लगभग एक करोड़ शिव लिंगों का निर्माण कर उनका विधिवत रुद्राभिषेक किया और देर शाम उन्हें वाल्मीकि नदी में विसर्जित कर दिया गया।
पार्थिव पूजन के लिये तैयारियां तो मंगलवार की देर शाम से ही शुरु हो गयी। रैपुरा के पास से लाई गई काली मिट्टी को गीला कर उसके लोदे बनाने के बाद से दद्दा शिष्य मंडल के लोग उन्हें एक पार्थिव लिंग के एवज में एक लोई में परिवर्तित कर चुके थे।
बुधवार को पौ फटते ही देश भर आये दद्दा जी के शिष्यों ने लिंगों के निर्माण के लिये कमर कस ली थी। रैन बसेरा परिसर के विशाल पंडाल में जगह-जगह पर रखी परातें और उनमें बने शिव लिंग भक्तों को उनके निर्माण का आमंत्रण था। पास में ही दद्दा के शिष्य मिट्टी की कटी हुई लोई, चावल, पुष्प, बेलपत्र भी वितरित करते जा रहे थे। देखते ही देखते भक्तों के उमड़े सैलाब ने दोपहर दो बजे के बाद तक महारुद्रों का निर्माण कर कोपरों पर
शिव धाम में पहुंचा दिये। दोपहर दो बजे के बाद सभी पार्थिव शिव लिंगों का पूजन पूरे विधि विधान के साथ वेद पाठी ब्राह्मणों ने सम्पन्न कराया। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी ' ने दोपहर के समय खुद ही विशाल पंडाल पर पहुंच कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि रुद्रों का निर्माण कर रहे हर भक्त के पास पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने भक्तों को रुद्र बनाते समय भगवत स्मरण करने का निर्देश देने के साथ ही उनकी कुशल क्षेम भी पूंछी। इस दौरान स्टेज से मुम्बई से आये फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे के दल ने भक्ति रस की गंगा उडे़लनी जारी की हुई थी। भक्तों के मुख से ऊं नम: शिवाय का जाप भी निरंतर चल रहा था। दोपहर के बाद सभी रुद्रों को लादकर लालापुर की वाल्मीकि नदी ले जाया गया जहां पर फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राज पाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीप राज राणा, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, संतोष उपाध्याय, पीएन सिंह, संजय अग्रवाल व देश भर के आये दद्दा शिष्य मंडल के प्रमुखों ने उनका विसर्जन किया। उधर मंदाकिनी के राम घाट पर मंदाकिनी बचाओ संघर्ष समिति के कमलेश दीक्षित के नेतृत्व में भी प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया।
पूरे परिवार के साथ आये राजपाल
Jul 08, 11:02 pm
चित्रकूट। भले ही उनका मुख्य व्यवसाय खेती हो और उन्होंने अपनी इसी आजीविका के साधन के बदौलत अपने बालकों को फिल्मी दुनिया में संघर्ष करने का हौसला दिया हो, पर अब उन्हें खेती की उतनी चिंता नही जबकि मौसम जुताई का है। खेती की चिंता से बेपरवाह फिल्मी दुनिया के सहारे अपने ही साथ परिवार का नाम रोशन करने वाले राज पाल यादव का पूरा परिवार इन दिनों चित्रकूट में शिव की भक्ति में तल्लीन है। यह बात और है कि अन्य सेलीबिट्री की तरह ही लोग उनके पास जाते हैं पर पेशे से किसान नवरंग सिंह यादव बड़े ही विनम्र स्वर में कहते हैं कि कि भइया वे तो आज भी अपने गांव कुंडरा में खेती ही करते हैं। आधे से ज्यादा पुत्र भले ही मायानगरी में पहुंच अपने अपने दम पर खड़े होने की जद्दोजहद में लगे हैं पर उनका इरादा अभी भी गांव की मिट्टी में ही रहने का है।
श्री नवरंग गोदावरी इंटरटेनमेंट प्रोडक्शन हाउस के जरिये फिल्म निर्माण में कदम रखने वाले फिल्म अभिनेता राज पाल यादव के लघु भ्राता चंद्र पाल यादव विश्वास जताते हैं कि दद्दा जी के आर्शीवाद से उनको सफलता मिलेगी। उनकी जल्द ही शुरू होने वाली फिल्म में आशु भैया व उनके बड़े भाई का दमदार रोल है और इस अनाम फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू हो जायेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में भाग लेने वैसे तो उनके गांव से लगभग 100 से 150 लोग आये हैं जिसमें इनके परिवार के लगभग पच्चीस लोग शामिल हैं। पिता नवरंग सिंह यादव, ताऊ बाबू सिया राम सिंह यादव, इन्द्र पाल यादव, सत्यपाल यादव राजेश पाल यादव के साथ ही घर की महिलायें व बच्चे भी शिव लिंग निर्माण में तन्मयता से जुटे हुये हैं।
चित्रकूट। भले ही उनका मुख्य व्यवसाय खेती हो और उन्होंने अपनी इसी आजीविका के साधन के बदौलत अपने बालकों को फिल्मी दुनिया में संघर्ष करने का हौसला दिया हो, पर अब उन्हें खेती की उतनी चिंता नही जबकि मौसम जुताई का है। खेती की चिंता से बेपरवाह फिल्मी दुनिया के सहारे अपने ही साथ परिवार का नाम रोशन करने वाले राज पाल यादव का पूरा परिवार इन दिनों चित्रकूट में शिव की भक्ति में तल्लीन है। यह बात और है कि अन्य सेलीबिट्री की तरह ही लोग उनके पास जाते हैं पर पेशे से किसान नवरंग सिंह यादव बड़े ही विनम्र स्वर में कहते हैं कि कि भइया वे तो आज भी अपने गांव कुंडरा में खेती ही करते हैं। आधे से ज्यादा पुत्र भले ही मायानगरी में पहुंच अपने अपने दम पर खड़े होने की जद्दोजहद में लगे हैं पर उनका इरादा अभी भी गांव की मिट्टी में ही रहने का है।
श्री नवरंग गोदावरी इंटरटेनमेंट प्रोडक्शन हाउस के जरिये फिल्म निर्माण में कदम रखने वाले फिल्म अभिनेता राज पाल यादव के लघु भ्राता चंद्र पाल यादव विश्वास जताते हैं कि दद्दा जी के आर्शीवाद से उनको सफलता मिलेगी। उनकी जल्द ही शुरू होने वाली फिल्म में आशु भैया व उनके बड़े भाई का दमदार रोल है और इस अनाम फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू हो जायेगी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में भाग लेने वैसे तो उनके गांव से लगभग 100 से 150 लोग आये हैं जिसमें इनके परिवार के लगभग पच्चीस लोग शामिल हैं। पिता नवरंग सिंह यादव, ताऊ बाबू सिया राम सिंह यादव, इन्द्र पाल यादव, सत्यपाल यादव राजेश पाल यादव के साथ ही घर की महिलायें व बच्चे भी शिव लिंग निर्माण में तन्मयता से जुटे हुये हैं।
भोले की भक्ति में डूबी धर्मनगरी
Jul 08, 11:03 pm
चित्रकूट। एक शिष्य का वादा गुरु के साथ और उसको पूरा करने की भूमि भी वह जिसे सदियों से तप करने वालों के साथ ही भगवान राम के आश्रय स्थल के रुप में पूरा विश्व जानता है। अपने गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज को किये गये वादे महारुद्र निर्माण की श्रंखला का यह अंतिम पैंतालीसवां संकल्प महा महोत्सव वास्तव में इतना विशेष हो गया कि जैसे रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा स्थल के आसपास पूरा नगर बस गया और इस तीर्थ क्षेत्र का पूरा वातावरण सावन के पावन महीने में भोले मय हो गया।
महामहोत्सव के शुरुआत में ही आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' साफ तौर पर अपने शिष्यों को कहा था कि वे इस पैंतालीसवें महारुद्र पूजन के बाद से उनके गुरु ऋण से मुक्त हो जायेंगे। बुधवार को सुबह से ही लगभग पचास हजार भक्तों ने मुख्य पंडाल पर डेरा जमा एक करोड़ रुद्रों का निर्माण कर डाला। इसके साथ ही मुम्बई से आये सुजीत ठाकुर व सागर से आये राम ठाकुर ने अपने भजनों से भक्तों के अंदर ऊर्जा को बनाये रखने में सहायता की। शाम को आठ बजे से रास लीला का आनंद वृन्दावन से आये बृजेश आदर्श राम लीला मंडल ने कराया। पूरे दिन भर की दिन चर्या को स्पष्ट करते हुए दद्दा जी के शिष्यों में प्रमुख आशुतोष राणा ने बताया कि प्रतिदिन शाम को पांच बजे लोई काटने का क्रम शुरू हो जायेगा और दूसरे दिन सुबह शिव लिंग निर्माण के प्रतिदिन के लक्ष्य की पूर्ति के बाद ही तुरंत ही उनका महारुद्राभिषेक विद्वान आचार्यो के द्वारा किया जायेगा। इसके बाद सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करेंगे व तत्पश्चात विसर्जन का कार्यक्रम होगा। लोई काटने के दौरान संगीतकार सुजीत चौबे व राम ठाकुर अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे व बीच-बीच में वेद पाठी ब्राह्मण वेदों की ऋचाओं का सस्वर गायन पाठ करेंगे। बताया कि यज्ञ शाला में सवा ग्यारह हजार आहुतियां डाली जायेगी। इसके साथ ही रामायण मेला परिसर में एक सौ आठ पुराणों को भी सजाया गया है। बताया कि यह कार्यक्रम सोलह जुलाई तक चलेगा। भले ही लक्ष्य की पूर्ति किसी भी दिन हो जाये पर ज्यादा रुद्रों के निर्माण से सभी का भला ही होगा।
चित्रकूट। एक शिष्य का वादा गुरु के साथ और उसको पूरा करने की भूमि भी वह जिसे सदियों से तप करने वालों के साथ ही भगवान राम के आश्रय स्थल के रुप में पूरा विश्व जानता है। अपने गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज को किये गये वादे महारुद्र निर्माण की श्रंखला का यह अंतिम पैंतालीसवां संकल्प महा महोत्सव वास्तव में इतना विशेष हो गया कि जैसे रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा स्थल के आसपास पूरा नगर बस गया और इस तीर्थ क्षेत्र का पूरा वातावरण सावन के पावन महीने में भोले मय हो गया।
महामहोत्सव के शुरुआत में ही आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' साफ तौर पर अपने शिष्यों को कहा था कि वे इस पैंतालीसवें महारुद्र पूजन के बाद से उनके गुरु ऋण से मुक्त हो जायेंगे। बुधवार को सुबह से ही लगभग पचास हजार भक्तों ने मुख्य पंडाल पर डेरा जमा एक करोड़ रुद्रों का निर्माण कर डाला। इसके साथ ही मुम्बई से आये सुजीत ठाकुर व सागर से आये राम ठाकुर ने अपने भजनों से भक्तों के अंदर ऊर्जा को बनाये रखने में सहायता की। शाम को आठ बजे से रास लीला का आनंद वृन्दावन से आये बृजेश आदर्श राम लीला मंडल ने कराया। पूरे दिन भर की दिन चर्या को स्पष्ट करते हुए दद्दा जी के शिष्यों में प्रमुख आशुतोष राणा ने बताया कि प्रतिदिन शाम को पांच बजे लोई काटने का क्रम शुरू हो जायेगा और दूसरे दिन सुबह शिव लिंग निर्माण के प्रतिदिन के लक्ष्य की पूर्ति के बाद ही तुरंत ही उनका महारुद्राभिषेक विद्वान आचार्यो के द्वारा किया जायेगा। इसके बाद सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करेंगे व तत्पश्चात विसर्जन का कार्यक्रम होगा। लोई काटने के दौरान संगीतकार सुजीत चौबे व राम ठाकुर अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे व बीच-बीच में वेद पाठी ब्राह्मण वेदों की ऋचाओं का सस्वर गायन पाठ करेंगे। बताया कि यज्ञ शाला में सवा ग्यारह हजार आहुतियां डाली जायेगी। इसके साथ ही रामायण मेला परिसर में एक सौ आठ पुराणों को भी सजाया गया है। बताया कि यह कार्यक्रम सोलह जुलाई तक चलेगा। भले ही लक्ष्य की पूर्ति किसी भी दिन हो जाये पर ज्यादा रुद्रों के निर्माण से सभी का भला ही होगा।
चित्रकूट में संकल्प पूर्ति महामहोत्सव शुरू
Jul 09, 01:42 am
चित्रकूट। ''ऊं नम: शिवाय, ऊं नम: शिवाय'', भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए यह जाप सैकड़ों मुख मंडल से निकल कर धर्मनगरी में गुंजायमान हो रहा था। चाहे बच्चे हों या बूढ़े, महिलाएं हों या पुरुष, आम आदमी हो या फिर हस्ती सभी श्रावण मास में शुरू हुई भक्ति रस की बारिश में भीगना चाह रहे थे।
यह दृश्य किसी मंदिर का नहीं बल्कि यहां पर बुधवार को शुरू हुए संकल्प पूर्ति महोत्सव का था। महामहोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु पार्थिव शिवलिंग बनाने में जुटे थे। रैन बसेरा परिसर के विशाल पंडाल में जगह-जगह रखी गयी मिंट्टी से भरी परातें भक्तों को शिवलिंग निर्माण के लिए आमंत्रित कर रहे थे। कुछ भक्त मिट्टी की लोई, चावल, पुष्प, बेलपत्र भी वितरित करते जा रहे थे।
बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सभी तन्मयता से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करने में जुटे थे। इस अनुष्ठान में रुपहले पर्दे से धर्मनगरी की जमीन पर उतरे फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीप राज राणा, अनुपम कौशिक, संजीव वत्स, अरुंधती, मनीषा ओझा, पूर्वी भट्टं, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, चंद्र पाल यादव ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
16 जुलाई तक चलने वाले इस महोत्सव में भक्तों ने भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए लगभग सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाने का संकल्प लिया है। महामहोत्सव के पहले ही दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्यों ने पहले ही दिन लगभग एक करोड़ शिवलिंगों का निर्माण कर डाला।
पार्थिव पूजन के लिए तैयारियां तो मंगलवार की देर शाम से ही शुरू हो गयीं थीं। रैपुरा के पास से लायी गयी काली मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बना दिये गये थे। बुधवार को पौ फटते ही देश भर से आये दद्दा जी के शिष्य शिवलिंगों के निर्माण में जुट गये।
देखते ही देखते भक्तों के सैलाब ने दोपहर दो बजे के बाद तक महारुद्रों का निर्माण कर शिवधाम में पहुंचा दिये। इसके बाद सभी पार्थिव शिवलिंगों का पूजन पूरे विधि विधान के साथ वेद पाठी ब्राह्मणों ने संपन्न कराया। दद्दा जी ने खुद ही विशाल पंडाल पर पहुंच कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि रुद्रों का निर्माण कर रहे हर भक्त के पास पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने भक्तों को रुद्र बनाते समय भगवत स्मरण करने का निर्देश देने के साथ ही उनकी कुशल क्षेम भी पूछी। इस दौरान मुंबई से आये फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे भक्ति रस की गंगा बहाते रहे। भक्तों का ओम नम: शिवाय का जाप भी निरंतर चल रहा था।
दोपहर बाद सभी रुद्रों को लालापुर की वाल्मीकि नदी ले जाया गया जहां पर फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव समेत अन्य फिल्मी हस्तियों व देश भर के आये दद्दा शिष्य मंडल के लोगों ने उनका विसर्जन किया। उधर मंदाकिनी के राम घाट पर मंदाकिनी बचाओ संघर्ष समिति के कमलेश दीक्षित के नेतृत्व में भी प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया।
चित्रकूट। ''ऊं नम: शिवाय, ऊं नम: शिवाय'', भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए यह जाप सैकड़ों मुख मंडल से निकल कर धर्मनगरी में गुंजायमान हो रहा था। चाहे बच्चे हों या बूढ़े, महिलाएं हों या पुरुष, आम आदमी हो या फिर हस्ती सभी श्रावण मास में शुरू हुई भक्ति रस की बारिश में भीगना चाह रहे थे।
यह दृश्य किसी मंदिर का नहीं बल्कि यहां पर बुधवार को शुरू हुए संकल्प पूर्ति महोत्सव का था। महामहोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु पार्थिव शिवलिंग बनाने में जुटे थे। रैन बसेरा परिसर के विशाल पंडाल में जगह-जगह रखी गयी मिंट्टी से भरी परातें भक्तों को शिवलिंग निर्माण के लिए आमंत्रित कर रहे थे। कुछ भक्त मिट्टी की लोई, चावल, पुष्प, बेलपत्र भी वितरित करते जा रहे थे।
बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सभी तन्मयता से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करने में जुटे थे। इस अनुष्ठान में रुपहले पर्दे से धर्मनगरी की जमीन पर उतरे फिल्मी सितारे आशुतोष राणा, राजपाल यादव, ठाकुर पद्म सिंह, दीप राज राणा, अनुपम कौशिक, संजीव वत्स, अरुंधती, मनीषा ओझा, पूर्वी भट्टं, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण, चंद्र पाल यादव ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया।
16 जुलाई तक चलने वाले इस महोत्सव में भक्तों ने भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिए लगभग सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाने का संकल्प लिया है। महामहोत्सव के पहले ही दिन आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्यों ने पहले ही दिन लगभग एक करोड़ शिवलिंगों का निर्माण कर डाला।
पार्थिव पूजन के लिए तैयारियां तो मंगलवार की देर शाम से ही शुरू हो गयीं थीं। रैपुरा के पास से लायी गयी काली मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बना दिये गये थे। बुधवार को पौ फटते ही देश भर से आये दद्दा जी के शिष्य शिवलिंगों के निर्माण में जुट गये।
देखते ही देखते भक्तों के सैलाब ने दोपहर दो बजे के बाद तक महारुद्रों का निर्माण कर शिवधाम में पहुंचा दिये। इसके बाद सभी पार्थिव शिवलिंगों का पूजन पूरे विधि विधान के साथ वेद पाठी ब्राह्मणों ने संपन्न कराया। दद्दा जी ने खुद ही विशाल पंडाल पर पहुंच कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि रुद्रों का निर्माण कर रहे हर भक्त के पास पहुंचने का प्रयास किया। उन्होंने भक्तों को रुद्र बनाते समय भगवत स्मरण करने का निर्देश देने के साथ ही उनकी कुशल क्षेम भी पूछी। इस दौरान मुंबई से आये फिल्म संगीतकार सुजीत चौबे भक्ति रस की गंगा बहाते रहे। भक्तों का ओम नम: शिवाय का जाप भी निरंतर चल रहा था।
दोपहर बाद सभी रुद्रों को लालापुर की वाल्मीकि नदी ले जाया गया जहां पर फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव समेत अन्य फिल्मी हस्तियों व देश भर के आये दद्दा शिष्य मंडल के लोगों ने उनका विसर्जन किया। उधर मंदाकिनी के राम घाट पर मंदाकिनी बचाओ संघर्ष समिति के कमलेश दीक्षित के नेतृत्व में भी प्रतीकात्मक विसर्जन किया गया।
बुधवार, 8 जुलाई 2009
संकल्प पूर्ति यज्ञ के लिए प्रशासन ने हाथ बंटाया
Jun 16, 02:18 am
चित्रकूट। तीर्थ क्षेत्र के रामायण मेला परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में होने वाले पैंतालीसवें संकल्प पूर्ति महारुद्र यज्ञ के लिए जहां एक तरफ दद्दा शिष्य मंडल तैयारियां करने में रात दिन एक किये हुए हैं वहीं आज मौके पर जिलाधिकारी हृदेश कुमार भी अपनी पूरी प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचकर आयोजकों के साथ बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह आयोजन इस जिले में होने वाला विशेष है। इसके लिए सभी को टीम भावना के तहत काम करना है।
कार्यक्रम का प्रमुख रुप से काम काज देख रहे फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने प्रशासन की तरफ से मदद करने के लिए चौबीस घंटे बिजली, पानी और सफाई के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के लिए कहा। जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीडब्लू डी अधिशासी अधिकारी एके शर्मा को वीवीआईपी गेस्ट हाउस में बिजली दुरस्त करवाये जाने के साथ ही अधिशाषी अभियंता बिजली कमलेश कुमार को मेला प्रांगण में चौबीस घंटे बिजली के प्रवाह के लिये एमडी व चेयरमैन से बात कर सुचारु व्यवस्था के लिए कहा। एएसपी जुगुल किशोर को आने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए कहा।
चित्रकूट। तीर्थ क्षेत्र के रामायण मेला परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में होने वाले पैंतालीसवें संकल्प पूर्ति महारुद्र यज्ञ के लिए जहां एक तरफ दद्दा शिष्य मंडल तैयारियां करने में रात दिन एक किये हुए हैं वहीं आज मौके पर जिलाधिकारी हृदेश कुमार भी अपनी पूरी प्रशासनिक टीम के साथ पहुंचकर आयोजकों के साथ बैठक कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह आयोजन इस जिले में होने वाला विशेष है। इसके लिए सभी को टीम भावना के तहत काम करना है।
कार्यक्रम का प्रमुख रुप से काम काज देख रहे फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा ने प्रशासन की तरफ से मदद करने के लिए चौबीस घंटे बिजली, पानी और सफाई के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं के लिए कहा। जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीडब्लू डी अधिशासी अधिकारी एके शर्मा को वीवीआईपी गेस्ट हाउस में बिजली दुरस्त करवाये जाने के साथ ही अधिशाषी अभियंता बिजली कमलेश कुमार को मेला प्रांगण में चौबीस घंटे बिजली के प्रवाह के लिये एमडी व चेयरमैन से बात कर सुचारु व्यवस्था के लिए कहा। एएसपी जुगुल किशोर को आने वाले सभी लोगों की सुरक्षा के लिए कहा।
जीने की राह दिखाती धर्मनगरी : राजपाल
Jun 24, 02:45 am
चित्रकूट। फिल्मों में अपने अभिनय से धूम मचाने वाले राजपाल यादव का मानना है कि चित्रकूट जीवन जीने का प्रेरणा स्थल है। यहां पर स्वयं भगवान राम, मां जानकी और लक्ष्मण के साथ साढ़े ग्यारह साल तक रहे।
वैदिक आध्यात्म को आत्मसात करने में लगे फिल्म स्टार राजपाल यादव ने सोमवार शाम यहां उतरते ही सबसे पहले चित्रकूट की रज माथे पर लगायी। धर्मनगरी में आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ के सिलसिले में यहां आये राजपाल यादव ने मंगलवार को रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा में बन रहे विशाल पंडाल का निरीक्षण किया। वह डीएम हृदेश कुमार से मिले और संकल्प पूर्ति महोत्सव की तैयारियों व प्रशासन द्वारा दिये जाने वाले सहयोग के बाबत चर्चा की।
उप्र के ही शाहजहांपुर के छोटे से गांव कुंडरा के मूल निवासी राजपाल यादव ने एक विशेष भेंट में बताया कि उन्होंने लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य अकादमी से डिप्लोमा लेने के बाद दिल्ली में भारतीय नाट्य संस्थान से डिग्री ली। उसके बाद मुम्बई का रुख किया। आम स्ट्रगलर की तरह ही उन्होंने भी वह सब किया जो दूसरे करते हैं, पर आत्म विश्वास के चलते उन्हें वर्ष 99 में 'जंगल' फिल्म मिली। जंगल के हिट होने के बाद तो फिल्मों की लाइन लग गयी।
चित्रकूट। फिल्मों में अपने अभिनय से धूम मचाने वाले राजपाल यादव का मानना है कि चित्रकूट जीवन जीने का प्रेरणा स्थल है। यहां पर स्वयं भगवान राम, मां जानकी और लक्ष्मण के साथ साढ़े ग्यारह साल तक रहे।
वैदिक आध्यात्म को आत्मसात करने में लगे फिल्म स्टार राजपाल यादव ने सोमवार शाम यहां उतरते ही सबसे पहले चित्रकूट की रज माथे पर लगायी। धर्मनगरी में आगामी आठ जुलाई से होने वाले यज्ञ के सिलसिले में यहां आये राजपाल यादव ने मंगलवार को रामायण मेला परिसर और रैन बसेरा में बन रहे विशाल पंडाल का निरीक्षण किया। वह डीएम हृदेश कुमार से मिले और संकल्प पूर्ति महोत्सव की तैयारियों व प्रशासन द्वारा दिये जाने वाले सहयोग के बाबत चर्चा की।
उप्र के ही शाहजहांपुर के छोटे से गांव कुंडरा के मूल निवासी राजपाल यादव ने एक विशेष भेंट में बताया कि उन्होंने लखनऊ की भारतेन्दु नाट्य अकादमी से डिप्लोमा लेने के बाद दिल्ली में भारतीय नाट्य संस्थान से डिग्री ली। उसके बाद मुम्बई का रुख किया। आम स्ट्रगलर की तरह ही उन्होंने भी वह सब किया जो दूसरे करते हैं, पर आत्म विश्वास के चलते उन्हें वर्ष 99 में 'जंगल' फिल्म मिली। जंगल के हिट होने के बाद तो फिल्मों की लाइन लग गयी।
धर्मनगरी में दिखेंगे बनारस के घाट
Jun 29, 11:45 pm
चित्रकूट। भगवान राम की कर्मभूमि और बाबा भोले की नगरी का मिलन, वह भी एक ही स्थान पर। यह सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है जिसे लोग 7 जुलाई से देखेंगे। इस तरह का काम किया है फिल्म फना, हल्ला बोल, रेस और आपका सुरूर जैसे फिल्मों से पहचान बना चुके दो सेट डिजायनरों ने।
एम आर क्रियेशन के नाम पर पहली पिक्चर बनारस से ही फिल्म इंड्रस्टी में पहचान बना चुके मार्तन्ड और रश्मि बताते हैं मंदाकिनी के तट पर बना राम घाट उन्हें काफी पसंद आया। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व राजपाल यादव से सलाह करने बाद जब दद्दा जी से बात की गयी तो उन्होंने आदेश दिया कि भगवान राम की कर्मभूमि पर नौ दिनों तक वे लोग भगवान शिव की आराधना संकल्प पूर्ति महायज्ञ के साथ करेंगे। इसलिए काशी को चित्रकूट से मिलाकर कुछ करना चाहिये। फिर उन्होंने काशी के घाटों के साथ ही राम घाट का सम्मिश्रण कर एक नई थीम पैदा करने का प्रयास किया। इस थीम में जहां काशी के मणिकटिंका व राजा हरिश्चंद्र घाट के साथ ही अन्य घाटों के दर्शन होंगे वहीं रामघाट का वैभव भी दिखाई देगा। बनारस के मूल निवासी मार्तन्ड और रश्मि कहते हैं कि अकेला फूल गुलदस्ता नहीं बन सकता, इसी प्रकार नकल में भी कल्पना जुड़ ही जाती है। इसमें सच्चाई के साथ ही कल्पना का भी समावेश किया गया है। दोनों लोग 21 जून से लगभग 27 लोगों के साथ काम कर रहे हैं। प्लाई, मिट्टी, रिफाइंड, फेवीकोल और घास के साथ ही तमाम और चीजों के सम्मिश्रण से तैयार स्टेज को 3 जुलाई को पूरा करने का टारगेट बताते हुए कहते हैं कि आगे के दो दिन फिनिशिंग वर्क के लिए रखे गये हैं। 7 जुलाई को कार्यक्रम शुरू होने के बाद तो यह सबके लिए खुल जायेगा।
चित्रकूट। भगवान राम की कर्मभूमि और बाबा भोले की नगरी का मिलन, वह भी एक ही स्थान पर। यह सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है जिसे लोग 7 जुलाई से देखेंगे। इस तरह का काम किया है फिल्म फना, हल्ला बोल, रेस और आपका सुरूर जैसे फिल्मों से पहचान बना चुके दो सेट डिजायनरों ने।
एम आर क्रियेशन के नाम पर पहली पिक्चर बनारस से ही फिल्म इंड्रस्टी में पहचान बना चुके मार्तन्ड और रश्मि बताते हैं मंदाकिनी के तट पर बना राम घाट उन्हें काफी पसंद आया। फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व राजपाल यादव से सलाह करने बाद जब दद्दा जी से बात की गयी तो उन्होंने आदेश दिया कि भगवान राम की कर्मभूमि पर नौ दिनों तक वे लोग भगवान शिव की आराधना संकल्प पूर्ति महायज्ञ के साथ करेंगे। इसलिए काशी को चित्रकूट से मिलाकर कुछ करना चाहिये। फिर उन्होंने काशी के घाटों के साथ ही राम घाट का सम्मिश्रण कर एक नई थीम पैदा करने का प्रयास किया। इस थीम में जहां काशी के मणिकटिंका व राजा हरिश्चंद्र घाट के साथ ही अन्य घाटों के दर्शन होंगे वहीं रामघाट का वैभव भी दिखाई देगा। बनारस के मूल निवासी मार्तन्ड और रश्मि कहते हैं कि अकेला फूल गुलदस्ता नहीं बन सकता, इसी प्रकार नकल में भी कल्पना जुड़ ही जाती है। इसमें सच्चाई के साथ ही कल्पना का भी समावेश किया गया है। दोनों लोग 21 जून से लगभग 27 लोगों के साथ काम कर रहे हैं। प्लाई, मिट्टी, रिफाइंड, फेवीकोल और घास के साथ ही तमाम और चीजों के सम्मिश्रण से तैयार स्टेज को 3 जुलाई को पूरा करने का टारगेट बताते हुए कहते हैं कि आगे के दो दिन फिनिशिंग वर्क के लिए रखे गये हैं। 7 जुलाई को कार्यक्रम शुरू होने के बाद तो यह सबके लिए खुल जायेगा।
आहुतियां देने को तैयार हो गयी यज्ञशाला
Jul 04, 10:26 pm
चित्रकूट। सात जुलाई से होने वाले महारुद्र यज्ञ के लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्य यहां यज्ञ की सफलता के लिए जीजान से जुटे हैं।
पिछले तीस यज्ञों से दद्दा धाम व यज्ञशाला का निर्माण करने वाले उत्तम सिंह कहते हैं कि उनका मूल कार्य खेती और स्टोन क्रशर का है, पर उन्होंने दद्दा जी के बताये नक्से के अनुसार इस यज्ञशाला व दद्दा धाम का निर्माण कैसे कर लिया वे स्वयं ही नही जानते। उन्होंने बताया कि इस यज्ञ शाला को अलौकिक रूप देने के लिए हर गृह की अलग-अलग वेदिकाओं का निर्माण किया गया है। इसमें राम महायज्ञ की सवा ग्यारह हजार आहुतियों के साथ ही निर्मित होने वाले महारुद्रों की पूर्णाहुति की आहुतियां भी दी जायेगी। यज्ञशाला के निर्माण के बारे में बताया कि 30 गुणा 30 की इस यज्ञ शाला को भव्यता देने के लिए ऊपर मंदिर का स्वरूप दिया गया है। इसमें अधिकतर सामग्री का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया गया है। बताया कि उनकी सहायता के यहां पर लगातार इलाहाबाद के निवासी संतोष कुमार उपाध्याय उनके साथ हैं।
चित्रकूट। सात जुलाई से होने वाले महारुद्र यज्ञ के लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्य यहां यज्ञ की सफलता के लिए जीजान से जुटे हैं।
पिछले तीस यज्ञों से दद्दा धाम व यज्ञशाला का निर्माण करने वाले उत्तम सिंह कहते हैं कि उनका मूल कार्य खेती और स्टोन क्रशर का है, पर उन्होंने दद्दा जी के बताये नक्से के अनुसार इस यज्ञशाला व दद्दा धाम का निर्माण कैसे कर लिया वे स्वयं ही नही जानते। उन्होंने बताया कि इस यज्ञ शाला को अलौकिक रूप देने के लिए हर गृह की अलग-अलग वेदिकाओं का निर्माण किया गया है। इसमें राम महायज्ञ की सवा ग्यारह हजार आहुतियों के साथ ही निर्मित होने वाले महारुद्रों की पूर्णाहुति की आहुतियां भी दी जायेगी। यज्ञशाला के निर्माण के बारे में बताया कि 30 गुणा 30 की इस यज्ञ शाला को भव्यता देने के लिए ऊपर मंदिर का स्वरूप दिया गया है। इसमें अधिकतर सामग्री का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया गया है। बताया कि उनकी सहायता के यहां पर लगातार इलाहाबाद के निवासी संतोष कुमार उपाध्याय उनके साथ हैं।
शिवधाम में सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण
Jul 06, 10:56 pm
चित्रकूट। कुछ ऐसे क्षण जिन्हें हमेशा के लिए आंखों में बसा लेने को जी चाहे। ऐसा ही मौका उपलब्ध कराया है गुरु पूर्णिमा महोत्सव में आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' ने। आयोजन के मुख्य मंच का निर्माण किया है कई फिल्मों में सेट बना चुके मार्तन्ड मिश्र व रश्मि शर्मा ने। 7 से 16 तक जून तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव के बावत मार्तन्ड व रश्मि ने कहाकि देव भूमि पर जब संत के आर्शीवाद के साथ कलाकार की कल्पना काम करती है तो फिर चीजें खुद ब खुद नायाब हो जाती हैं।
चित्रकूट के पावन स्थल पर मुख्य मंच का डिजायन करने के साथ ही बनाने का काम अपने आपमें बहुत ही सुखद अनुभव बताते हुये कहा कि भोले बाबा की नगरी माने जाने वाली काशी के साथ ही अद्भुत तीर्थ स्थल चित्रकूट के घाटों का नायाब समन्वय स्थापित करने से मंच अद्वितीय हो गया है। मंच के साथ ही रैन बसेरा परिसर का एक कोना दद्दा धाम व दूसरा विशालकाय कोना यज्ञ मंडप के लिए आरक्षित है। दोनो ही स्थानों को सुन्दर रूप देने वाले उत्तम सिंह कहते हैं कि यह सब तो दद्दा जी आर्शीवाद का परिणाम है। वे तो सिर्फ कर्ता है, करवाने वाले दद्दा जी हैं। रामायण मेला परिसर का लोहिया सभागार 108 पुराणों के विशेष स्टालों का सुन्दर केंद्र बना हुआ है। काली मिट्टी से निर्मित होने वाले बाबा शिव के सवा पांच करोड़ रुद्रों के निर्माण के लिये भी एक अलग से विशालकाय शामयाने का निर्माण किया गया है। सेठ राधा कृष्ण पोद्वार इंटर कालेज के विशालकाय प्रांगण में भोजनालय है। यहां का पूरा काम सतीश राय देखेंगे। यहां शामियाने के नीचे लगभग पचास हजार श्रद्धालु एक साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। जबकि लगभग पच्चीस हजार लोग खाने के लिए इंतजार भी कर सकते हैं।
पूरे कार्यक्रम में शुरुआती दौर से आकर व्यवस्थाओं को देखने वाले सुरेन्द्र सुहाने,फिल्म अभिनेता पदम सिंह, फिल्म निर्माता इंद्र पाल यादव, केवल कृष्ण, इलाहाबाद के संतोष उपाध्याय, सुनील सुहाने, विवेक थरानिया,अनुपम कौशिक, संजय अग्रवाल,दीपक अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, नीलांशु चतुर्वेदी आदि लोग शामिल हैं।
चित्रकूट। कुछ ऐसे क्षण जिन्हें हमेशा के लिए आंखों में बसा लेने को जी चाहे। ऐसा ही मौका उपलब्ध कराया है गुरु पूर्णिमा महोत्सव में आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' ने। आयोजन के मुख्य मंच का निर्माण किया है कई फिल्मों में सेट बना चुके मार्तन्ड मिश्र व रश्मि शर्मा ने। 7 से 16 तक जून तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव के बावत मार्तन्ड व रश्मि ने कहाकि देव भूमि पर जब संत के आर्शीवाद के साथ कलाकार की कल्पना काम करती है तो फिर चीजें खुद ब खुद नायाब हो जाती हैं।
चित्रकूट के पावन स्थल पर मुख्य मंच का डिजायन करने के साथ ही बनाने का काम अपने आपमें बहुत ही सुखद अनुभव बताते हुये कहा कि भोले बाबा की नगरी माने जाने वाली काशी के साथ ही अद्भुत तीर्थ स्थल चित्रकूट के घाटों का नायाब समन्वय स्थापित करने से मंच अद्वितीय हो गया है। मंच के साथ ही रैन बसेरा परिसर का एक कोना दद्दा धाम व दूसरा विशालकाय कोना यज्ञ मंडप के लिए आरक्षित है। दोनो ही स्थानों को सुन्दर रूप देने वाले उत्तम सिंह कहते हैं कि यह सब तो दद्दा जी आर्शीवाद का परिणाम है। वे तो सिर्फ कर्ता है, करवाने वाले दद्दा जी हैं। रामायण मेला परिसर का लोहिया सभागार 108 पुराणों के विशेष स्टालों का सुन्दर केंद्र बना हुआ है। काली मिट्टी से निर्मित होने वाले बाबा शिव के सवा पांच करोड़ रुद्रों के निर्माण के लिये भी एक अलग से विशालकाय शामयाने का निर्माण किया गया है। सेठ राधा कृष्ण पोद्वार इंटर कालेज के विशालकाय प्रांगण में भोजनालय है। यहां का पूरा काम सतीश राय देखेंगे। यहां शामियाने के नीचे लगभग पचास हजार श्रद्धालु एक साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। जबकि लगभग पच्चीस हजार लोग खाने के लिए इंतजार भी कर सकते हैं।
पूरे कार्यक्रम में शुरुआती दौर से आकर व्यवस्थाओं को देखने वाले सुरेन्द्र सुहाने,फिल्म अभिनेता पदम सिंह, फिल्म निर्माता इंद्र पाल यादव, केवल कृष्ण, इलाहाबाद के संतोष उपाध्याय, सुनील सुहाने, विवेक थरानिया,अनुपम कौशिक, संजय अग्रवाल,दीपक अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, नीलांशु चतुर्वेदी आदि लोग शामिल हैं।
हर जगह दिखेंगी देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां
Jul 06, 10:56 pm
चित्रकूट। न गणेश उत्सव है और न नव दुर्गा पूजा फिर भी यहां पर बन रही देव प्रतिमाओं को देखकर इन विशेष मौकों की याद जरुर आ जाती है। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के संकल्पित महा महोत्सव में हर ओर देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं दिखेंगी। पुराण पंडालों के लिये 108 श्री राधा कृष्ण की युगल मूर्तियों के अलावा शिव परिवार, श्रीराम दरबार के साथ ही तमाम ऐसे देवताओं की मूर्तियों को यहां जबलपुर के कलाकार अंतिम रूप देने में जी जान से जुटे हैं।
मुख्य मूर्तिकार जबलपुर के राकेश चक्रवर्ती ने बताया कि लगभग एक महीने के अथक परिश्रम के बाद लगभग बीस सहयोगियों के साथ सोलह बड़ी देवताओं की मूर्तियों के साथ 108 श्री राधा कृष्ण की मूर्तियों का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि वे लगभग 17 सालों से दद्दा जी के साथ हैं और हर एक महोत्सव में उन्होंने ही सभी मूर्तियों को बनाया है।
उन्होंने बताया कि उन्हें मूर्तियां बनाने के लिये कई जगहों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। यहां पर श्री राम दरबार, शिव दरबार, श्री गणेश, श्री राधा कृष्ण के साथ ही कुछ और मूर्तियों को बड़ा स्वरुप दिया गया है। बाकी एक सौ आठ छोटी मूर्तियां 108 पुराणों के पंडालों में रखी जायेंगी। मूर्तियों में लगने वाली सामग्री के बारे में बताया कि चारा, टोकने, बांस, सुतली, लकड़ी, कील, मिट्टी, प्लास्टर आफ पेरिस और रंगों की सहायता से वाटर प्रूफ व साधारण मूर्तियों को बनाया गया है।
चित्रकूट। न गणेश उत्सव है और न नव दुर्गा पूजा फिर भी यहां पर बन रही देव प्रतिमाओं को देखकर इन विशेष मौकों की याद जरुर आ जाती है। आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के संकल्पित महा महोत्सव में हर ओर देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं दिखेंगी। पुराण पंडालों के लिये 108 श्री राधा कृष्ण की युगल मूर्तियों के अलावा शिव परिवार, श्रीराम दरबार के साथ ही तमाम ऐसे देवताओं की मूर्तियों को यहां जबलपुर के कलाकार अंतिम रूप देने में जी जान से जुटे हैं।
मुख्य मूर्तिकार जबलपुर के राकेश चक्रवर्ती ने बताया कि लगभग एक महीने के अथक परिश्रम के बाद लगभग बीस सहयोगियों के साथ सोलह बड़ी देवताओं की मूर्तियों के साथ 108 श्री राधा कृष्ण की मूर्तियों का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि वे लगभग 17 सालों से दद्दा जी के साथ हैं और हर एक महोत्सव में उन्होंने ही सभी मूर्तियों को बनाया है।
उन्होंने बताया कि उन्हें मूर्तियां बनाने के लिये कई जगहों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। यहां पर श्री राम दरबार, शिव दरबार, श्री गणेश, श्री राधा कृष्ण के साथ ही कुछ और मूर्तियों को बड़ा स्वरुप दिया गया है। बाकी एक सौ आठ छोटी मूर्तियां 108 पुराणों के पंडालों में रखी जायेंगी। मूर्तियों में लगने वाली सामग्री के बारे में बताया कि चारा, टोकने, बांस, सुतली, लकड़ी, कील, मिट्टी, प्लास्टर आफ पेरिस और रंगों की सहायता से वाटर प्रूफ व साधारण मूर्तियों को बनाया गया है।
यमुना में किया जायेगा रुद्रों का विसर्जन
Jul 07, 11:23 pm
चित्रकूट। मंदाकिनी को बचाने में लगे यहां के संतो-महंतों व समाजसेवियों की पहल काम आ गयी। अभियान के अगुआ रहे कमलेश दीक्षित को ही फिल्म स्टार आशुतोष राणा ने महारुद्रों के मूर्ति विसर्जन की जिम्मेदारी सौंप दी। राणा ने कहा कि इसमें विवाद की कोई बात नही है। मंदाकिनी में प्रतीकात्मक विसर्जन के बाद मूर्तियों को राजापुर से होकर निकली यमुना में विसर्जित किया जायेगा।
वैसे इसके पूर्व कमलेश ने प्रशासन सहित आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' व फिल्म स्टार आशुतोष राणा को पत्र भेजकर पावन मंदाकिनी के महत्व को बताते हुये कहा था कि यह तीर्थ क्षेत्र में बहने वाली नदी पहले ही भयानक प्रदूषण के कारण कराह रही है। इसका सांस्कृतिक और पौराणिक के साथ ही धार्मिक महत्व है। इसकी सहायक नदियों सरयू, झूरी व पयस्वनी का तो लगभग अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उनके भाव भरे पत्र को पढ़कर आशुतोष राणा ने उन्हें बुलाया और मंदाकिनी में मूर्तियां विसर्जित न की बात करते हुये कहा कि मूर्तियों को विसर्जित करने का काम मंदाकिनी बचाओ प्रदूषण मुक्ति आंदोलन के लोग करें प्रतीकात्मक विसर्जन के बाद वे उन्हें यमुना में विसर्जित कर दें। इस दौरान विधायक कटनी संजय पाठक, सतना के संजय अग्रवाल के साथ मंदाकिनी बचाओ समिति के तमाम लोग मौजूद रहे।
चित्रकूट। मंदाकिनी को बचाने में लगे यहां के संतो-महंतों व समाजसेवियों की पहल काम आ गयी। अभियान के अगुआ रहे कमलेश दीक्षित को ही फिल्म स्टार आशुतोष राणा ने महारुद्रों के मूर्ति विसर्जन की जिम्मेदारी सौंप दी। राणा ने कहा कि इसमें विवाद की कोई बात नही है। मंदाकिनी में प्रतीकात्मक विसर्जन के बाद मूर्तियों को राजापुर से होकर निकली यमुना में विसर्जित किया जायेगा।
वैसे इसके पूर्व कमलेश ने प्रशासन सहित आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' व फिल्म स्टार आशुतोष राणा को पत्र भेजकर पावन मंदाकिनी के महत्व को बताते हुये कहा था कि यह तीर्थ क्षेत्र में बहने वाली नदी पहले ही भयानक प्रदूषण के कारण कराह रही है। इसका सांस्कृतिक और पौराणिक के साथ ही धार्मिक महत्व है। इसकी सहायक नदियों सरयू, झूरी व पयस्वनी का तो लगभग अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उनके भाव भरे पत्र को पढ़कर आशुतोष राणा ने उन्हें बुलाया और मंदाकिनी में मूर्तियां विसर्जित न की बात करते हुये कहा कि मूर्तियों को विसर्जित करने का काम मंदाकिनी बचाओ प्रदूषण मुक्ति आंदोलन के लोग करें प्रतीकात्मक विसर्जन के बाद वे उन्हें यमुना में विसर्जित कर दें। इस दौरान विधायक कटनी संजय पाठक, सतना के संजय अग्रवाल के साथ मंदाकिनी बचाओ समिति के तमाम लोग मौजूद रहे।
महा महोत्सव को लेकर प्रशासन मुस्तैद
Jul 07, 11:24 pm
चित्रकूट। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव को लेकर जितना परेशान आयोजक हैं उससे भी ज्यादा प्रशासन है। और हो भी क्यों न जब आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्य ही ऐसे हैं। फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, पदम सिंह, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण के साथ ही तमाम शीर्ष पदों में बैठे राज नेता व अधिकारी यहां की पुलिस के साथ राजस्व विभाग व अन्य विभागों के लिए परेशानी का सबब बने हुये हैं। पुलिस ने तो पहले से ही अपने आपको चौकन्ना कर मेटल डिटेक्टर, डाग स्क्वाड की व्यवस्था के साथ ही फायर बिग्रेड मौके पर पहुंचा दी है। एलआईयू, आईबी के जवान भी मौके पर हर एक पल की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं।
बाहर से आये पीपीएस व तमाम जवान अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं पर मेला क्षेत्र में लगातार पुलिस कप्तान राकेश प्रधान, अपर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर, पुलिस उपाधीक्षक आलोक जायसवाल व इंसपेक्टर कोतवाली चंद्र धर गौड़ की मौजूदगी और व्यवस्थाओं के बारे में लगातार आयोजकों के साथ ही बातचीत उनकी चिंता को स्पष्ट कर देती है। कई दौरों की बैठकों और लगातार सुरक्षा को लेकर ही रहे बदलाव का मूल उद्देश्य स्पष्ट करते हुये कि उनका काम बार से आये लोगों को इस प्रकार सुरक्षा उपलब्ध कराना है कि जब वे यहां से जायें तो उनकी भावना यहां के प्रति अच्छी हो। उधर प्रशासनिक अधिकारियों में एसडीएम बीपी खरे व तहसीलदार अश्विनी कुमार ने भी फिल्म स्टार आशुतोष राणा से मिलकर मौजूदा व्यवस्थाओं के बारे में चर्चा की। जल संस्थान के सहायक अभियंता प्रेम चंद्र रिछारिया व अवर अभियंता आर के पांडेय ने भी उनसे मिलकर संस्थान द्वारा उपलब्ध कराये गयी जल की व्यवस्था की जानकारी देने के बाद कहा कि और भी व्यवस्थायें पूरी कर दी जायेंगी। नगर पालिका के कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लगे रहे।
चित्रकूट। संकल्प पूर्ति महामहोत्सव को लेकर जितना परेशान आयोजक हैं उससे भी ज्यादा प्रशासन है। और हो भी क्यों न जब आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के शिष्य ही ऐसे हैं। फिल्म स्टार आशुतोष राणा, राजपाल यादव, पदम सिंह, फिल्म निर्माता केवल कृष्ण के साथ ही तमाम शीर्ष पदों में बैठे राज नेता व अधिकारी यहां की पुलिस के साथ राजस्व विभाग व अन्य विभागों के लिए परेशानी का सबब बने हुये हैं। पुलिस ने तो पहले से ही अपने आपको चौकन्ना कर मेटल डिटेक्टर, डाग स्क्वाड की व्यवस्था के साथ ही फायर बिग्रेड मौके पर पहुंचा दी है। एलआईयू, आईबी के जवान भी मौके पर हर एक पल की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं।
बाहर से आये पीपीएस व तमाम जवान अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं पर मेला क्षेत्र में लगातार पुलिस कप्तान राकेश प्रधान, अपर पुलिस अधीक्षक जुगुल किशोर, पुलिस उपाधीक्षक आलोक जायसवाल व इंसपेक्टर कोतवाली चंद्र धर गौड़ की मौजूदगी और व्यवस्थाओं के बारे में लगातार आयोजकों के साथ ही बातचीत उनकी चिंता को स्पष्ट कर देती है। कई दौरों की बैठकों और लगातार सुरक्षा को लेकर ही रहे बदलाव का मूल उद्देश्य स्पष्ट करते हुये कि उनका काम बार से आये लोगों को इस प्रकार सुरक्षा उपलब्ध कराना है कि जब वे यहां से जायें तो उनकी भावना यहां के प्रति अच्छी हो। उधर प्रशासनिक अधिकारियों में एसडीएम बीपी खरे व तहसीलदार अश्विनी कुमार ने भी फिल्म स्टार आशुतोष राणा से मिलकर मौजूदा व्यवस्थाओं के बारे में चर्चा की। जल संस्थान के सहायक अभियंता प्रेम चंद्र रिछारिया व अवर अभियंता आर के पांडेय ने भी उनसे मिलकर संस्थान द्वारा उपलब्ध कराये गयी जल की व्यवस्था की जानकारी देने के बाद कहा कि और भी व्यवस्थायें पूरी कर दी जायेंगी। नगर पालिका के कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लगे रहे।
चित्रकूट के अनुष्ठानों से संदेश लेने की आवश्यकता : राजपाल
Jul 07, 11:24 pm
चित्रकूट। जीवन जीने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जाओं की आवश्यकता हर एक व्यक्ति को होती है और विशिष्ट ऊर्जा धार्मिक अनुष्ठानों में ही मिलती है।
बुधवार को यहां आयोजित होने वाले महायज्ञ में शामिल होने आये फिल्म जगत में अपना विशेष स्थान बना चुके राजपाल यादव ने कहा कि सभी का दायित्व है कि यहां के संदेश को पूरी दुनिया में ले जायें।
उन्होंने कहा भले ही यह यज्ञ उनके गुरु देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा उनके गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज को दिये गये संकल्प की पूर्ति हो, पर वास्तव में इसके आयोजित होने का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति व जन कल्याण ही है। सभी प्राणियों में सद्भावना का संचार होना भी इस यज्ञ का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि देश में जातियों के बीच वैमनस्यता बढ़ाने वाले यहां पर आकर देखें कि किस तरह से जाति, धर्म और संप्रदायों से ऊपर उठकर यहां पर आकर लोग महारुद्रों का निर्माण कर रहे हैं।
पूरे देश के युवाओं के साथ ही उन समाजसेवियों के सामने यह आदर्श दिया है कि अगर भावना सही हो तो सभी धर्मो के लोग एक जगह पर एक ही काम के लिए बैठ सकते हैं। फिल्मों में भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि वे कोई भी फिल्म यह सोचकर नहीं करते कि निर्माता या निर्देशक कौन हैं। वह सबसे पहले स्टोरी देखते हैं कि उनके करने लायक इसमें काम क्या हैं और वे अपने रोल में कितने फिट बैठकर काम कर पायेंगे।
चित्रकूट। जीवन जीने के लिए आध्यात्मिक ऊर्जाओं की आवश्यकता हर एक व्यक्ति को होती है और विशिष्ट ऊर्जा धार्मिक अनुष्ठानों में ही मिलती है।
बुधवार को यहां आयोजित होने वाले महायज्ञ में शामिल होने आये फिल्म जगत में अपना विशेष स्थान बना चुके राजपाल यादव ने कहा कि सभी का दायित्व है कि यहां के संदेश को पूरी दुनिया में ले जायें।
उन्होंने कहा भले ही यह यज्ञ उनके गुरु देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' द्वारा उनके गुरु स्वामी करपात्री जी महाराज को दिये गये संकल्प की पूर्ति हो, पर वास्तव में इसके आयोजित होने का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति व जन कल्याण ही है। सभी प्राणियों में सद्भावना का संचार होना भी इस यज्ञ का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि देश में जातियों के बीच वैमनस्यता बढ़ाने वाले यहां पर आकर देखें कि किस तरह से जाति, धर्म और संप्रदायों से ऊपर उठकर यहां पर आकर लोग महारुद्रों का निर्माण कर रहे हैं।
पूरे देश के युवाओं के साथ ही उन समाजसेवियों के सामने यह आदर्श दिया है कि अगर भावना सही हो तो सभी धर्मो के लोग एक जगह पर एक ही काम के लिए बैठ सकते हैं। फिल्मों में भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि वे कोई भी फिल्म यह सोचकर नहीं करते कि निर्माता या निर्देशक कौन हैं। वह सबसे पहले स्टोरी देखते हैं कि उनके करने लायक इसमें काम क्या हैं और वे अपने रोल में कितने फिट बैठकर काम कर पायेंगे।
मजदूरी के साथ ही मिलेगा पुण्य
Jul 07, 11:24 pm
चित्रकूट। लगभग दस ट्रक शुद्ध काली मिट्टी और उस पर पानी डालकर गूंधते हुये सैकड़ों हाथ। यह एक ऐसा दृश्य जिसे देखने के लिए पूरे देश से आये आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के हजारों भक्त काफी देर तक डटे रहे। हर एक की विचार धारा इस मामले पर लगभग एक ही थी। सभी के मुंह से चित्रकूट की पावन धरती पर सावन के महीने में पावन रुद्रों का निर्माण उनके हाथों से करवाने के पीछे धन्यवाद के स्वर निकल रहे थे।
सागर के रहने वाले उत्तम सिंह हों या फिर दमोह के राजेश अथवा सतना के संजय अग्रवाल हर एक के मुंह से धन्यवाद के स्वर ही फूटते दिखाई दे रहे थे। काली मिट्टी को गूंधने में लगे मजदूरों ने कहा यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें आम के आम और गुठलियों के दाम मिल रहे हैं। यहां पर काम करने के पैसे तो मिल ही रहे हैं और रुद्रों के निर्माण के लिए काली मिट्टी को गूंधने में जो पुण्य मिलेगा उससे वह लोग भी तर जायेंगे। कहा कि यह पावन धरती ऐसे ही आयोजनों की साक्षी रही है। काफी साल पहले यहां पर गायत्री परिवार के द्वारा आयोजित किये गये अश्वमेघ यज्ञ में भी ऐसा ही पुण्य प्राप्त हुआ था।
चित्रकूट। लगभग दस ट्रक शुद्ध काली मिट्टी और उस पर पानी डालकर गूंधते हुये सैकड़ों हाथ। यह एक ऐसा दृश्य जिसे देखने के लिए पूरे देश से आये आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' के हजारों भक्त काफी देर तक डटे रहे। हर एक की विचार धारा इस मामले पर लगभग एक ही थी। सभी के मुंह से चित्रकूट की पावन धरती पर सावन के महीने में पावन रुद्रों का निर्माण उनके हाथों से करवाने के पीछे धन्यवाद के स्वर निकल रहे थे।
सागर के रहने वाले उत्तम सिंह हों या फिर दमोह के राजेश अथवा सतना के संजय अग्रवाल हर एक के मुंह से धन्यवाद के स्वर ही फूटते दिखाई दे रहे थे। काली मिट्टी को गूंधने में लगे मजदूरों ने कहा यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें आम के आम और गुठलियों के दाम मिल रहे हैं। यहां पर काम करने के पैसे तो मिल ही रहे हैं और रुद्रों के निर्माण के लिए काली मिट्टी को गूंधने में जो पुण्य मिलेगा उससे वह लोग भी तर जायेंगे। कहा कि यह पावन धरती ऐसे ही आयोजनों की साक्षी रही है। काफी साल पहले यहां पर गायत्री परिवार के द्वारा आयोजित किये गये अश्वमेघ यज्ञ में भी ऐसा ही पुण्य प्राप्त हुआ था।
मां होती है सबसे पहली गुरु
Jul 07, 11:24 pm
चित्रकूट। भगवान राम की कर्मस्थली में सवा पांच करोड़ महारुद्रों का निर्माण कराने जा रहे आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' का कहना है कि अपने गुरु को दिये गये महासंकल्प का समापन साधना की इस अनोखी स्थली से हो गया। उन्होंने गुरु पूजन की श्रंखला के निपटने के बाद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि कल से वे अपने गुरु को दिये वायदे को पूरा कर पाने की दिशा में आगे बढ़ जायेंगे। वैसे तो गुरु के ऋण से कोई कभी मुक्त हो नहीं सकता पर पैंतालीसवां महारुद्र निर्माण महायज्ञ उनके जीवन को सर्वाधिक प्रसन्नता देने वाला सिद्ध होगा। गुरु के महत्व को शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि किसी भी व्यक्ति की सबसे पहली गुरु उसकी मां होती है, क्योंकि जन्म के बाद वही उसे दीक्षा देकर सांसारिक जीवन जीने को दीक्षित करती है। माता व पिता से बड़ा गुरु हो ही नहीं सकता। उन्होंने गणेश जी का दृष्टांत बताते हुये कहा कि उन्होंने मां और पिता की परिक्रमा करके ही पूरी सृष्टि की परिक्रमा को चरितार्थ कर कार्तिकेय जी पर विजय प्राप्त कर बाबा भोले और मां पार्वती से मुहर भी लगवा ली थी। इस दौरान बाहर के प्रांतों से आये आचार्य जी के हजारों शिष्य भी मौजूद रहे।
चित्रकूट। भगवान राम की कर्मस्थली में सवा पांच करोड़ महारुद्रों का निर्माण कराने जा रहे आचार्य देव प्रभाकर शास्त्री 'दद्दा जी' का कहना है कि अपने गुरु को दिये गये महासंकल्प का समापन साधना की इस अनोखी स्थली से हो गया। उन्होंने गुरु पूजन की श्रंखला के निपटने के बाद भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि कल से वे अपने गुरु को दिये वायदे को पूरा कर पाने की दिशा में आगे बढ़ जायेंगे। वैसे तो गुरु के ऋण से कोई कभी मुक्त हो नहीं सकता पर पैंतालीसवां महारुद्र निर्माण महायज्ञ उनके जीवन को सर्वाधिक प्रसन्नता देने वाला सिद्ध होगा। गुरु के महत्व को शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि किसी भी व्यक्ति की सबसे पहली गुरु उसकी मां होती है, क्योंकि जन्म के बाद वही उसे दीक्षा देकर सांसारिक जीवन जीने को दीक्षित करती है। माता व पिता से बड़ा गुरु हो ही नहीं सकता। उन्होंने गणेश जी का दृष्टांत बताते हुये कहा कि उन्होंने मां और पिता की परिक्रमा करके ही पूरी सृष्टि की परिक्रमा को चरितार्थ कर कार्तिकेय जी पर विजय प्राप्त कर बाबा भोले और मां पार्वती से मुहर भी लगवा ली थी। इस दौरान बाहर के प्रांतों से आये आचार्य जी के हजारों शिष्य भी मौजूद रहे।
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